यूपी के ग्राम प्रधानों को लेकर बड़ा अपडेट, कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर चल रही कानूनी और प्रशासनिक रस्साकशी के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने ग्राम प्रधानों के कार्यकाल विस्तार और चुनाव की समय-सीमा को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है।

कोर्ट ने चुनाव की तारीख पर मांगा स्पष्ट जवाब

हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह यह स्पष्ट करे कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव आखिर कब कराए जाएंगे। कोर्ट ने इस मुद्दे पर सरकार से भी ठोस और स्पष्ट जानकारी पेश करने को कहा है।

कार्यकाल विस्तार पर जताई नाराजगी

राज्य सरकार द्वारा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने बढ़ाए जाने के फैसले पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने इस फैसले के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में देरी को लेकर स्पष्टता जरूरी है।

OBC आरक्षण भी पेश करने का निर्देश

कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि आगामी सुनवाई में ओबीसी आरक्षण से संबंधित आयोग की रिपोर्ट पेश की जाए। यह रिपोर्ट पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

26 मई को खत्म हो चुका था कार्यकाल

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है। चुनाव समय पर न हो पाने के कारण सरकार ने कार्यकाल छह महीने बढ़ाकर प्रधानों को प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति दी है।

याचिका के बाद बढ़ा विवाद

ग्राम प्रधानों के कार्यकाल विस्तार के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में देरी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से कई कड़े सवाल पूछे हैं।

10 जुलाई को अगली सुनवाई

इस मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई में सरकार और निर्वाचन आयोग को सभी जरूरी दस्तावेज और स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

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