47 गांव होंगे परियोजना का हिस्सा
प्रस्तावित कॉरिडोर अलीगढ़ जिले के 47 राजस्व गांवों से होकर गुजरेगा। इनमें तहसील कोल और गभाना के गांव प्रमुख रूप से शामिल हैं। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और राजस्व अभिलेखों के संग्रह की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां जमीन से जुड़ी जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं ताकि आगे की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
तेज और सुरक्षित होगा सफर
हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर बनने के बाद अलीगढ़ से मुरादाबाद के बीच यात्रा अधिक सुविधाजनक और तेज हो जाएगी। सीमित प्रवेश और निकास वाली इस आधुनिक सड़क पर यातायात का दबाव कम रहेगा, जिससे यात्रा का समय घटेगा और सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों के बीच संपर्क को मजबूत करेगा।
डीपीआर और डिजाइन पर काम
परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और तकनीकी डिजाइन तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए विशेषज्ञ कंसल्टेंसी कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। परियोजना का अंतिम स्वरूप तय करने से पहले जमीन, भूगोल और यातायात से जुड़ी विभिन्न जानकारियों का अध्ययन किया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा फायदा
कॉरिडोर के निर्माण का सबसे बड़ा लाभ उन गांवों को मिलने की उम्मीद है जो इसके मार्ग में स्थित हैं। बेहतर सड़क संपर्क से कृषि उत्पादों का परिवहन आसान होगा, व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच भी पहले की तुलना में अधिक सुगम हो जाएगी।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर फोकस
परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है। संबंधित अधिकारी गांवों के नक्शे, खसरा-खतौनी और अन्य राजस्व रिकॉर्ड का सत्यापन कर रहे हैं। इसके आधार पर हाईवे का अंतिम एलाइनमेंट और निर्माण योजना तैयार की जाएगी।

0 comments:
Post a Comment