क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। मार्च 2026 में जहां विमानन ईंधन (ATF) की कीमत लगभग ₹60.50 प्रति लीटर थी, वहीं मई 2026 तक यह बढ़कर करीब ₹142 प्रति लीटर पहुंच गई। यानी सिर्फ दो महीनों में कीमतों में लगभग 135 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
ईंधन महंगा होने से एयरलाइंस की परिचालन लागत भी तेजी से बढ़ी। पहले जहां कुल खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत के आसपास थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ऐसे में एयरलाइंस पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा था।
क्या है सरकार की नई व्यवस्था?
सरकार द्वारा मंजूर ₹10,000 करोड़ की सहायता राशि तेल विपणन कंपनियों को ब्याज-मुक्त अग्रिम के रूप में दी जाएगी। यह योजना अगले 36 महीनों यानी तीन वर्षों तक लागू रहेगी या फिर तब तक जारी रहेगी जब तक पूरी राशि की वसूली नहीं हो जाती।
नई व्यवस्था के तहत यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतें तय मानक से अधिक जाती हैं, तो अंतर का भुगतान इस कोष से किया जाएगा। वहीं यदि कीमतें कम होती हैं, तो अतिरिक्त लाभ की राशि वापस सरकारी कोष में जमा कराई जाएगी। इससे ईंधन कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव का असर सीधे एयरलाइंस पर नहीं पड़ेगा।
यात्रियों को कैसे मिलेगा फायदा?
एयरलाइंस कंपनियों के खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा ईंधन पर होता है। जब ईंधन महंगा होता है तो कंपनियां टिकटों के दाम बढ़ाने पर मजबूर हो जाती हैं। लेकिन सरकार की इस सहायता योजना से एयरलाइंस को लागत प्रबंधन में मदद मिलेगी।
जानकारों का मानना है कि इससे हवाई किरायों में अचानक होने वाली भारी बढ़ोतरी पर रोक लग सकती है। त्योहारों, छुट्टियों और व्यस्त यात्रा सीजन में भी किरायों को अपेक्षाकृत स्थिर रखने में मदद मिलेगी। इसका सीधा लाभ आम यात्रियों को मिलेगा।
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