106 स्कूलों पर कार्रवाई, 700 से ज्यादा शिक्षक प्रभावित
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए चलाए जा रहे नामांकन अभियान में कई विद्यालय अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। इसके बाद 106 विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रधान शिक्षक और बीपीएससी से नियुक्त शिक्षकों सहित 700 से अधिक कर्मियों के वेतन पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।जिला स्तर पर हुई समीक्षा में पाया गया कि कई विद्यालयों में नए छात्रों के नामांकन को लेकर पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए, जबकि विभाग ने विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया था।
6 से 14 वर्ष के बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य
शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों को 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया था। खासकर कक्षा एक में अधिक से अधिक नए बच्चों का प्रवेश कराने पर जोर दिया गया था ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। लेकिन समीक्षा के दौरान कई विद्यालयों में नामांकन की रफ्तार अपेक्षा से काफी कम पाई गई, जिसके बाद विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही माना।
घर-घर अभियान नहीं चलाना पड़ा भारी
जांच में सामने आया कि कई स्कूलों ने घर-घर संपर्क अभियान, अभिभावक जागरूकता कार्यक्रम और स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को गंभीरता से नहीं लिया। परिणामस्वरूप नामांकन योग्य बड़ी संख्या में बच्चे विद्यालयों तक नहीं पहुंच सके। अधिकारियों का मानना है कि यदि विद्यालय स्तर पर सक्रिय प्रयास किए जाते तो नामांकन के आंकड़े बेहतर हो सकते थे।
डीईओ के निर्देश पर शुरू हुई कार्रवाई
सीवान के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) राघवेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश के बाद स्थापना शाखा ने संबंधित शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं और निर्देशों के पालन में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
बिहार में शिक्षा सुधार की दिशा में सख्त कदम
शिक्षा विभाग का मानना है कि नामांकन अभियान केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शिक्षा से वंचित बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मिशन है। इसी कारण जवाबदेही तय करने के लिए यह कार्रवाई की गई है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी यदि किसी विद्यालय में नामांकन, उपस्थिति या शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है।

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