एआई करेगा शिकायतों का विश्लेषण
नए सिस्टम के तहत आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाली भूमि विवाद संबंधी शिकायतों का एआई टूल द्वारा विश्लेषण किया जाएगा। यह तकनीक प्रत्येक शिकायत का संक्षिप्त विवरण तैयार कर संभावित समाधान के विकल्प सुझाएगी। इसके आधार पर राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर मामलों का निस्तारण करेंगे, ताकि केवल कागजी नहीं बल्कि वास्तविक समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
लाखों शिकायतें अभियान के दायरे में
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच राज्य में लगभग 11.26 लाख भूमि विवाद संबंधी शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें से करीब 9.70 लाख शिकायतों को इस विशेष अभियान में शामिल किया गया है। प्रशासन का मानना है कि पहले कई मामलों में केवल औपचारिक निस्तारण हुआ था, जबकि जमीनी स्तर पर विवाद अब भी बने हुए हैं।
चार श्रेणियों में बांटी गई शिकायतें
प्रभावी समाधान के लिए सभी शिकायतों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। जिन मामलों का पहले ही समाधान हो चुका है, जिनमें मौके पर सत्यापन आवश्यक है, लंबित और अनसुलझे विवाद, भूमि विवाद से अलग शिकायतें। इस वर्गीकरण से अधिकारियों को मामलों की स्थिति समझने और कार्रवाई करने में आसानी होगी।
सार्वजनिक भूमि पर कब्जे पर सख्ती
अभियान के दौरान सबसे अधिक ध्यान सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों पर दिया जा रहा है। तालाब, खलिहान, खेल मैदान, श्मशान और चकरोड जैसी जमीनों पर अवैध कब्जों के मामलों में राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम कार्रवाई करेगी।
जमीनी स्तर पर निगरानी भी होगी मजबूत
अभियान के तहत हर सप्ताह न्याय पंचायत स्तर पर ग्राम चौपाल का आयोजन किया जाएगा, जहां भूमि विवादों की समीक्षा की जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर समस्याओं को तेजी से पहचानने और समाधान करने में मदद मिलेगी।
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