यूपी सरकार का सख्त एक्शन: इन अधिकारियों पर गिरेगी गाज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने चकबंदी व्यवस्था को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से लंबित चकबंदी मामलों को निपटाने में लापरवाही और भ्रष्टाचार को देखते हुए अब सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। चकबंदी विभाग में कार्यरत ऐसे अधिकारियों की पहचान की जा रही है, जिनकी कार्यशैली संतोषजनक नहीं है या जिन पर अनियमितताओं के आरोप हैं। इस पूरी प्रक्रिया के तहत उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (VRS) देने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

स्क्रीनिंग समिति करेगी अधिकारियों की जांच

इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए चकबंदी आयुक्त द्वारा चार सदस्यीय स्क्रीनिंग समिति का गठन किया गया है। इस समिति में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं, जो जिलों से आने वाली सूचियों की गहन जांच करेंगे। जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे 50 वर्ष से अधिक आयु और 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके ऐसे अधिकारियों की सूची तैयार करें, जिनकी कार्यप्रणाली संदिग्ध या लापरवाही भरी रही हो।

15 दिनों के भीतर मांगी गई रिपोर्ट

सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों की सूची भेजी जाए। इसके बाद स्क्रीनिंग समिति इन नामों की समीक्षा करेगी और रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

लंबित मामलों पर भी सरकार की नजर

चकबंदी विभाग में इस समय हजारों मामले वर्षों से लंबित हैं। सरकार का मानना है कि इन मामलों के निस्तारण में ढिलाई का बड़ा कारण कुछ अधिकारियों की निष्क्रियता और पक्षपातपूर्ण रवैया है। इसी वजह से अब ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है, ताकि पूरी व्यवस्था को गति दी जा सके।

तीन महीने का नोटिस, फिर अनिवार्य सेवानिवृत्ति

स्क्रीनिंग समिति की रिपोर्ट के बाद संबंधित अधिकारियों को तीन महीने का नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद फंडामेंटल रूल्स-56 के तहत उन्हें जनहित में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। यह कदम प्रशासनिक सुधार और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

पक्षपात करने वालों पर भी होगी सख्त कार्रवाई

चकबंदी आयुक्त ने साफ कर दिया है कि सूची तैयार करने में किसी भी प्रकार की पक्षपातपूर्ण भूमिका बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई अधिकारी गलत रिपोर्ट देता है या जानबूझकर दोषियों को बचाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य पूरी प्रणाली को जवाबदेह और पारदर्शी बनाना है।

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