बिहार में 2 हजार मुखियाओं पर शिकंजा, 12 की कुर्सी खतरे में, मचा हड़कंप

पटना। बिहार की पंचायतों में विकास कार्यों को लेकर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। गांवों में योजनाओं के लिए जारी होने वाली सरकारी रकम के इस्तेमाल में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका जांची जा रही है। अलग-अलग स्तर पर हुई पड़ताल के बाद 2 हजार से अधिक मुखिया विभाग की निगरानी में हैं।

मामला केवल कागजी जांच तक सीमित नहीं है। जिन पंचायतों में अनियमितताओं के गंभीर संकेत मिले हैं, वहां जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। 12 मुखियाओं पर पद गंवाने का खतरा मंडरा रहा है और इनके मामलों में विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

विकास योजनाओं के खर्च का हो रहा हिसाब

पंचायतों में सड़क, नाली, पानी, रोशनी और स्वच्छता से जुड़े कई काम सरकारी योजनाओं के जरिए कराए जाते हैं। इन्हीं योजनाओं के क्रियान्वयन में नियमों के पालन और खर्च की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। अधिकारियों की जांच में यह देखा गया कि स्वीकृत योजना के मुताबिक काम हुआ या नहीं, भुगतान सही तरीके से किया गया या नहीं और संबंधित पंचायत के रिकॉर्ड में सभी जरूरी जानकारी दर्ज है या नहीं। इसी जांच के आधार पर कई पंचायतों को सवालों के घेरे में लिया गया है।

सोलर लाइट बनी जांच का बड़ा मुद्दा

गांवों की गलियों को रोशन करने के लिए लगाई गई सोलर स्ट्रीट लाइट भी जांच में महत्वपूर्ण बिंदु बनी है। कुछ पंचायतों में उपकरणों की गुणवत्ता और उनकी कार्यक्षमता को लेकर शिकायतें मिलीं। कहीं लाइटें जल्द खराब होने की बात सामने आई तो कहीं खरीद और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जरूरत महसूस हुई। अब अधिकारियों की नजर इस बात पर है कि योजना के लिए जारी रकम का इस्तेमाल तय नियमों के मुताबिक हुआ था या नहीं।

कागजों में काम और जमीन पर स्थिति की होगी तुलना

जांच के दौरान केवल फाइलों को देखने के बजाय रिकॉर्ड और वास्तविक काम के बीच मिलान पर भी जोर दिया गया। पंचायतों से जुड़े कई मामलों में काम का अनुमान, माप से संबंधित रिकॉर्ड और दूसरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। ऐसे मामलों में यह पता लगाना जरूरी है कि संबंधित योजना वास्तव में कितनी पूरी हुई और उसके बदले कितनी रकम जारी की गई। इसी आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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