वित्त मंत्रालय की ओर से 10 अगस्त को लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय दिया गया है। आयोग जरूरत पड़ने पर किसी विशेष विषय पर अंतरिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर सकता है।
3 नवंबर 2025 को हुआ था आयोग का गठन
8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई इसकी अध्यक्ष हैं। आयोग को केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े वेतन एवं लाभों की समीक्षा कर अपनी सिफारिशें देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार उसकी सिफारिशों पर विचार करेगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नया वेतनमान किस रूप में लागू किया जाएगा और कर्मचारियों को वास्तविक लाभ कब से मिलेगा।
लागू होने की तारीख पर स्थिति साफ नहीं
लोकसभा में सरकार से यह भी पूछा गया था कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें किस तारीख से प्रभावी होंगी। इसके जवाब में सरकार ने बताया कि चूंकि आयोग ने अभी अपनी सिफारिशें प्रस्तुत नहीं की हैं, इसलिए प्रभावी तारीख को लेकर फिलहाल कोई अंतिम जानकारी नहीं दी जा सकती। इसका सीधा मतलब है कि कर्मचारियों को अभी फिटमेंट फैक्टर, संशोधित बेसिक पे और भत्तों में संभावित बदलाव के लिए आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।
2.92 फिटमेंट फैक्टर की मांग चर्चा में
8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी संगठनों और आयोग के बीच बैठकों का दौर भी जारी है। हाल में दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान रेलवे कर्मचारियों से जुड़े एक संगठन ने 2.92 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है। यदि केवल उदाहरण के तौर पर 2.92 का फिटमेंट फैक्टर लगाया जाए तो गणना के आधार पर बेसिक पे करीब 52,560 रुपये हो सकती है।
डीए को बेसिक पे में जोड़ने की भी मांग
कर्मचारी संगठनों की ओर से महंगाई भत्ते यानी डीए को बेसिक सैलरी में शामिल करने की मांग भी उठाई जा रही है। कर्मचारियों का तर्क है कि इससे संशोधित बेसिक वेतन बढ़ सकता है और भविष्य में कुछ भत्तों तथा सेवानिवृत्ति लाभों की गणना पर भी इसका असर पड़ सकता है। लेकिन डीए मर्जर को लेकर भी अभी केंद्र सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। इसी तरह फिटमेंट फैक्टर का अंतिम आंकड़ा भी तय नहीं हुआ है।
पेंशन और भत्तों पर भी रहेगी नजर
केंद्रीय कर्मचारियों के अलावा पेंशनर्स की नजर भी आयोग की सिफारिशों पर है। आयोग के दायरे में पेंशन और फैमिली पेंशन से जुड़े मामलों की समीक्षा भी शामिल है। इसलिए रिपोर्ट आने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पेंशन से जुड़े नियमों में क्या बदलाव सुझाए जाते हैं। वहीं कर्मचारियों के लिए एचआरए, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्तों में संभावित बदलाव भी महत्वपूर्ण रहेंगे। इन पर अंतिम तस्वीर आयोग की सिफारिश और उसके बाद सरकार के फैसले से ही स्पष्ट होगी।
अभी कर्मचारियों को करना होगा इंतजार
फिलहाल 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और आयोग विभिन्न पक्षों से सुझाव एवं मांगें जुटा रहा है। संसद में सरकार के जवाब से इतना जरूर स्पष्ट है कि अभी आयोग की अंतिम सिफारिशें सरकार के पास नहीं पहुंची हैं। इसलिए सोशल मीडिया या विभिन्न रिपोर्टों में सामने आ रहे फिटमेंट फैक्टर और संभावित वेतन वृद्धि के आंकड़ों को अंतिम फैसला मानना सही नहीं होगा। कर्मचारियों और पेंशनर्स को आयोग की रिपोर्ट तथा केंद्र सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

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