सरकार के इस फैसले से संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही निवारक कार्रवाई करने में अधिक अधिकार मिल सकेंगे। गृह विभाग की आरक्षी शाखा की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह व्यवस्था खासतौर पर उन मौकों पर प्रभावी होगी, जब बड़ी संख्या में लोग धार्मिक आयोजनों, जुलूसों और मेलों में शामिल होते हैं।
किन पुलिस अधिकारियों को मिला अधिकार?
सरकार की ओर से दी गई शक्तियां रेंज और प्रक्षेत्र में तैनात आईजी और डीआईजी के अलावा जिलों में कार्यरत एसएसपी, एसपी, सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी को दी गई हैं। हालांकि, इस व्यवस्था में रेलवे से जुड़े ग्रामीण एसपी को शामिल नहीं किया गया है। इन अधिकारियों को अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी के तौर पर कुछ कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।
त्योहारों के दौरान कर सकेंगे कार्रवाई
यह अधिकार प्रमुख पर्व-त्योहारों के दौरान आयोजित होने वाले जुलूस और मेलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किए जा सकेंगे। इनमें सरस्वती पूजा, होली, रामनवमी, दुर्गापूजा, दीपावली, ईद, बकरीद, मुहर्रम, काली पूजा, छठ पूजा और शब-ए-बरात जैसे आयोजन शामिल हैं। इन मौकों पर भीड़ अधिक होने के कारण कई बार तनाव या विवाद की स्थिति पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारियों को पहले से निवारक कदम उठाने में यह अधिकार मददगार हो सकता है।
BNSS की धाराओं के तहत मिलेगी शक्ति
पुलिस अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अध्याय 9 के तहत विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां दी गई हैं। यह प्रावधान धारा 125 से 143 तक लागू होता है। इन धाराओं के तहत किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बांड या मुचलका भरवाने जैसी निवारक कार्रवाई की जा सकती है। इसका उद्देश्य किसी संभावित विवाद या शांति भंग की स्थिति को गंभीर रूप लेने से पहले नियंत्रित करना है।
शांति भंग की आशंका पर पहले से कार्रवाई
नए अधिकार का एक अहम पहलू यह है कि पुलिस अधिकारी केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहेंगे। यदि किसी व्यक्ति से शांति भंग होने की आशंका है या उसके दोबारा अपराध करने की संभावना मानी जाती है, तो कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निवारक कदम उठाए जा सकते हैं। विशेष रूप से धारा 126 से 129 के तहत शांति भंग की आशंका वाले व्यक्तियों, संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों या आदतन अपराधियों से मुचलका अथवा बांड लेने जैसी कार्रवाई का प्रावधान है।
दोषसिद्ध व्यक्ति के मामले में भी प्रावधान
किसी व्यक्ति को अपराध में दोषी ठहराए जाने की स्थिति में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बांड की मांग से संबंधित अधिकार भी कानून में निर्धारित हैं। धारा 125 के तहत इस तरह की कार्रवाई का अधिकार संबंधित न्यायिक प्राधिकारी को दिया गया है। वहीं, अन्य परिस्थितियों में कार्यपालक दंडाधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सरकार के नए फैसले से पुलिस और दंडाधिकारी स्तर की कार्रवाई के बीच समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।
.png)
0 comments:
Post a Comment