बिहार में जमीन सर्वे को लेकर 5 बड़ी खुशखबरी, विवाद होंगे कम!

पटना। बिहार में जमीन के पुराने रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और भूमि विवादों पर लगाम लगाने के लिए चल रहा विशेष भूमि सर्वे अब तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का जोर इस बात पर है कि सर्वे के बाद जमीन से संबंधित दस्तावेज स्पष्ट और सुरक्षित हों, जिससे भविष्य में मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों को कम किया जा सके।

1. पांच छोटे जिलों में काम पूरा करने पर जोर

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने क्षेत्रफल के लिहाज से छोटे पांच जिलों में चल रहे सर्वे की प्रगति की समीक्षा की। इनमें जहानाबाद, लखीसराय, शिवहर, अरवल और शेखपुरा शामिल हैं। इन जिलों में सर्वे का काम तय समय में पूरा कराने के लिए कर्मचारियों को अन्य अभियानों से अलग रखा गया है। सरकार ने इन क्षेत्रों में 15 अगस्त तक काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

2. लापरवाही पर अधिकारियों की जवाबदेही

सर्वे के दौरान जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेजों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। समीक्षा में कुछ मौजों के आवश्यक रिकॉर्ड नहीं मिलने पर अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सर्वे कार्य में अनावश्यक देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रिकॉर्ड तैयार होने के साथ ही उसे संबंधित पोर्टल पर अपलोड करने और सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए लेवल-7 के अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। सर्वे की प्रगति की अगली समीक्षा भी निर्धारित अंतराल के बाद की जाएगी।

3. बंटवारा नहीं हुआ तो भी नहीं रुकेगा सर्वे

परिवार की जमीन का अभी तक आपसी बंटवारा नहीं हुआ है तो इससे सर्वे की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। ऐसी स्थिति में जमीन का रिकॉर्ड उस व्यक्ति के नाम पर जारी रह सकता है, जिसके नाम पर संबंधित भूमि पहले से दर्ज है। यानी केवल पारिवारिक बंटवारा नहीं होने की वजह से जमीन का सर्वे रोकने की जरूरत नहीं होगी। बाद में नियमानुसार बंटवारे की स्थिति के आधार पर रिकॉर्ड में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

4. चार चरणों में तैयार होगा जमीन का रिकॉर्ड

विशेष भूमि सर्वे एक साथ पूरा होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसे अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया जाता है। शुरुआत में गांव की सीमा और जमीन का नक्शा तैयार किया जाता है। इसके बाद भूमि के वास्तविक दावेदारों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर रिकॉर्ड तैयार करने का काम होता है। अगले चरण में तैयार दस्तावेजों और नक्शे को संबंधित लोगों के सामने रखा जाता है। यदि किसी व्यक्ति को रिकॉर्ड में आपत्ति होती है तो उसे अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। जांच और सुनवाई के बाद अंतिम रिकॉर्ड तैयार किया जाता है।

5. पुराने रिकॉर्ड की कमी के बावजूद आगे बढ़ रहा काम

बिहार में जमीन के पुराने दस्तावेजों की उपलब्धता भी सर्वे के सामने बड़ी चुनौती है। कई गांवों में दशकों पुराने कैडेस्ट्रल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण जमीन मालिकों से उनकी भूमि से संबंधित जानकारी और दस्तावेज लिए जा रहे हैं। ऐसे मामलों में रैयत अपनी जमीन का विवरण स्वघोषणा के माध्यम से उपलब्ध करा सकते हैं। विभाग की ओर से जमीन से संबंधित जानकारी जमा करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं।

करीब 90 साल बाद बड़े स्तर पर भूमि सर्वे

बिहार में लंबे अंतराल के बाद व्यापक स्तर पर जमीन का सर्वे कराया जा रहा है। इस अभियान की शुरुआत पहले चरण में वर्ष 2019 के आसपास हुई थी और अलग-अलग कारणों से इसकी समयसीमा में बदलाव होता रहा है। अब राज्यभर में भूमि सर्वे को पूरा करने के लिए दिसंबर 2027 तक का लक्ष्य रखा गया है। बिहार में बड़ी संख्या में रैयतों की जमीन का रिकॉर्ड इस प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।

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