8वें वेतन आयोग: पे-लेवल 6 से घटकर 3 होने की चर्चा तेज

नई दिल्ली। भारत सरकार के कर्मचारियों को हर दस साल में मिलने वाला वेतन आयोग सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनके जीवन स्तर में एक बड़ा बदलाव लाने वाली व्यवस्था होती है। अब जब 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की चर्चा शुरू हो चुकी है, तो इस बार सारा फोकस सिर्फ फिटमेंट फैक्टर पर नहीं, बल्कि एक "क्रांतिकारी प्रस्ताव" पर है—पे-लेवल्स का मर्जर (Pay Level Merger)।

क्या है यह पे-लेवल मर्जर प्रस्ताव?

आपको बता दें की 7वें वेतन आयोग ने कुल 18 पे-लेवल्स निर्धारित किए थे, जिनमें से शुरुआती 6 पे-लेवल्स (लेवल-1 से लेवल-6) सबसे ज्यादा कर्मचारियों से संबंधित हैं। अब सुझाव यह है कि इन 6 लेवल्स को मिलाकर सिर्फ 3 नए लेवल्स बनाए जाएं। यह कदम अगर लागू होता है, तो न सिर्फ सैलरी स्ट्रक्चर सरल होगा, बल्कि इससे कर्मचारियों को आर्थिक और प्रोफेशनल लाभ भी मिलेगा।

नया लेवल-A: लेवल-1 और लेवल-2 का विलय

नया लेवल-B: लेवल-3 और लेवल-4 का विलय

नया लेवल-C: लेवल-5 और लेवल-6 का विलय

पे-लेवल मर्जर से क्या होंगे फायदे?

1. बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल: मर्ज किए गए लेवल्स की नई बेसिक सैलरी ऊंचे लेवल के बराबर या उससे अधिक मानी जाएगी। उदाहरण: लेवल-1 की सैलरी ₹18,000 और लेवल-2 की ₹19,900 है। अगर ये मर्ज होकर नया लेवल-A बनाते हैं, तो बेसिक ₹21,700 तक जा सकती है। यानी बिना प्रमोशन के ही कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इज़ाफा होगा।

2. प्रमोशन की रफ्तार होगी तेज

मौजूदा सिस्टम में कर्मचारियों को छोटे-छोटे लेवल पार करने में वर्षों लग जाते हैं। मर्जर के बाद बड़े और सीमित लेवल्स होंगे, जिससे प्रमोशन का रास्ता छोटा होगा और तरक्की जल्दी मिलेगी। नतीजा: जल्दी पदोन्नति और अधिक जिम्मेदारी मिलेगी।

3. सैलरी विसंगतियों से मुक्ति

अभी निचले पे-लेवल्स में सैलरी अंतर (₹1000-₹3000 तक) भ्रम और असंतोष पैदा करता है। मर्जर से यह अंतर खत्म होगा और सैलरी स्ट्रक्चर ज्यादा पारदर्शी और न्यायसंगत बनेगा। हालांकि अभी ये सिर्फ प्रस्ताव हैं, सरकार के द्वारा अंतिम निर्णय लेना बाकी हैं।

कब लागू हो सकता है यह बदलाव?

8वें वेतन आयोग के गठन की उम्मीद 2025 के अंत तक की जा रही है, और इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती हैं। अगर तब तक यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो यह बदलाव उसी समय से प्रभावी होगा।

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