यूपी में पंचायत चुनाव और शहरी निकायों को लेकर बड़ी खबर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव और शहरी निकायों के गठन को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला सामने आया है। प्रदेश में अगले दो वर्षों तक नए शहरी निकायों के गठन या विस्तार पर रोक लगा दी गई है। इसका मुख्य कारण पंचायत चुनाव के लिए ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया का आरंभ होना और आगामी जनगणना कार्य है। यह निर्णय न केवल चुनाव प्रक्रिया को सुव्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक है, बल्कि प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन को भी बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद करेगा।

पंचायत चुनाव और ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन

उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में पंचायत चुनाव होना तय है। 2021 में हुए पिछली पंचायत चुनाव के बाद से कई ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी निकायों में शामिल किया गया है, जिसके कारण प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव हुआ है। इस बदलाव के चलते ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन अनिवार्य हो गया है, ताकि वे नए प्रशासनिक ढांचे के अनुरूप हो सकें। इस पुनर्गठन का उद्देश्य उन क्षेत्रों को स्पष्ट करना है जो अब शहरी निकायों का हिस्सा बन चुके हैं और जो अभी भी ग्राम पंचायतों के अधीन हैं।

नए शहरी निकायों के गठन पर रोक

ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होने के कारण नए शहरी निकायों के गठन की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है। इसका मकसद यह है कि नए निकायों का गठन पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के आधार पर हो ताकि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भ्रम और विवाद न उत्पन्न हों। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच सीमांकन स्पष्ट होगा और स्थानीय प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

जनगणना 2026 और प्रशासनिक इकाइयों की स्थापना पर रोक

इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा जनगणना 2026 की अधिसूचना जारी की गई है, जिसके तहत 31 दिसंबर 2026 के बाद किसी भी नई प्रशासनिक इकाई के गठन पर रोक रहेगी। यह रोक 1 मार्च 2027 तक लागू रहेगी। जनगणना के इस महत्वपूर्ण चरण में प्रशासनिक इकाइयों में कोई बड़ा बदलाव न हो, इसके लिए यह कदम उठाया गया है। इससे डेटा की विश्वसनीयता और जनगणना की शुद्धता सुनिश्चित होगी।

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