1. सांस संबंधी रोग
तुलसी की मंजरी में मौजूद यौगिक जैसे यूजेनॉल और सिनामिक एसिड श्वसन तंत्र को साफ करते हैं। इसका काढ़ा पीने से फेफड़ों में जमे बलगम को दूर किया जा सकता है।
2. वायरल संक्रमण:
तुलसी की मंजरी में प्राकृतिक एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। मौसमी बुखार, सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी बीमारियों से राहत के लिए यह अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
3. डायबिटीज (मधुमेह):
नियमित रूप से तुलसी की मंजरी का सेवन ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है। इसके कुछ सक्रिय तत्व इंसुलिन की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाते हैं।
4. हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग:
मंजरी का सेवन रक्त परिसंचरण को दुरुस्त करता है और तनाव को कम करता है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
5. स्किन डिज़ीज़ (चर्म रोग):
तुलसी की मंजरी को पीसकर त्वचा पर लगाने या उसका पानी पीने से एक्जिमा, दाद, फुंसी और एलर्जी जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
6. कैंसर बीमारियों में सहायक:
हालिया शोध में पाया गया है कि तुलसी की मंजरी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट सेल डैमेज को रोकते हैं और कैंसर की कोशिकाओं के विकास को बाधित कर सकते हैं।
7. मानसिक तनाव और अनिद्रा:
तुलसी की मंजरी का सेवन मानसिक शांति देता है और नींद को सुधारता है। यह तनाव को कम कर मस्तिष्क को शांत करती है।
कैसे करें उपयोग?
तुलसी की मंजरी का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पी सकते हैं। चाहें तो इन्हें सुखाकर चूर्ण के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हर्बल चाय में तुलसी की मंजरी डालना भी लाभकारी है।
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