राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन माफियाओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा करने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा और उनके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाएगा जैसा किसी अन्य संगठित अपराधी के साथ किया जाता है।
नई नीति के पीछे मकसद क्या है?
सरकार का प्रमुख उद्देश्य है की जमीन विवादों को जड़ से खत्म करना। इसके लिए भूमि रिकॉर्ड को अपडेट करना, पारदर्शिता बढ़ाना और आम नागरिकों को जमीन से जुड़े दस्तावेज सरलता से उपलब्ध कराना प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकारी स्तर पर यह भी निर्णय लिया गया है कि हर शनिवार को अंचल कार्यालयों में अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी की बैठक आयोजित होगी, ताकि जमीन विवादों का मौके पर समाधान हो सके।
जमीन माफियाओं की भूमिका और प्रशासन की चुनौती
कई जिलों में यह बात सामने आई है कि कुछ संगठित गिरोह फर्जी कागजात बनाकर या दबंगई के बल पर दूसरों की जमीन पर कब्जा कर लेते हैं। ऐसे मामलों में राजस्व अधिकारी अक्सर निर्णय नहीं ले पाते क्योंकि संबंधित पक्ष टाइटल सूट दाखिल कर मामला सिविल कोर्ट तक पहुंचा देते हैं, जिससे कार्रवाई लंबित हो जाती है। इसी वजह से, प्रशासन ने यह तय किया है कि यदि दस्तावेजों की वैधता पर संदेह हो, तो पुलिस तत्काल गहन जांच करे और आवश्यकता होने पर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
भारतीय न्याय संहिता और नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत कार्रवाई
अब तक जमीन कब्जे के मामलों को केवल राजस्व विवाद माना जाता था, लेकिन यदि दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं या बलपूर्वक कब्जा किया गया है, तो अब इन मामलों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत आपराधिक दृष्टिकोण से देखा जाएगा। यह बदलाव न केवल जमीन माफियाओं की गतिविधियों पर लगाम लगाएगा, बल्कि पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने में भी मदद करेगा।

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