बिहार में नहीं होगी बिजली की किल्लत, नागरिकों को बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार के नागरिकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब राज्य में बिजली संकट की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है। भागलपुर जिले के पीरपैंती में प्रस्तावित बिजली घर परियोजना को आखिरकार बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) की मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना न केवल बिहार के ऊर्जा क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि यह राज्य के औद्योगिक विकास और नागरिक जीवन को भी नई दिशा देगी।

परियोजना की खास बातें:

पीरपैंती में बनने वाला यह बिजली घर अदाणी पावर लिमिटेड द्वारा निर्मित किया जाएगा, जिसकी कुल क्षमता 2400 मेगावाट होगी। यह क्षमता तीन इकाइयों के माध्यम से प्राप्त होगी, जिनमें प्रत्येक की उत्पादन क्षमता 800 मेगावाट की होगी। आयोग ने 6.075 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद की अनुमति दी है, जो आने वाले समय में राज्य को स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेगी।

निवेश और रोजगार के नए अवसर:

बिहार सरकार की इस सबसे बड़ी बिजली परियोजना में अब तक का सबसे अधिक निवेश होने जा रहा है। इससे न केवल बिजली उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। परियोजना के निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर ठेकेदारी, परिवहन, श्रमिक और अन्य सहायक सेवाओं की मांग बढ़ेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।

केंद्रीय भूमिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी:

इस परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराने की योजना है। उम्मीद की जा रही है कि वे अपने आगामी 15 सितंबर के पूर्णिया दौरे के दौरान इस बिजली घर का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। राज्य सरकार की कोशिश है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस परियोजना की नींव रख दी जाए ताकि विकास के इस मॉडल को जनता के सामने प्रस्तुत किया जा सके।

आयोग की भूमिका और कानूनी प्रक्रिया:

चूंकि बिजली उत्पादन और खरीद के लिए नियामक मंजूरी आवश्यक होती है, बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड ने आयोग के समक्ष याचिका दाखिल की थी। आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी और सदस्यों अरुण कुमार सिन्हा व पीएस यादव ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद इस परियोजना को हरी झंडी दी। बिहार में बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिक गतिविधियों को देखते हुए ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह परियोजना राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

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