पुराने फार्मूले में बदलाव की मांग
वर्तमान समय में सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी तय करने के लिए जिस नियम का उपयोग किया जाता है, उसकी शुरुआत कई दशक पहले हुई थी। उस समय परिवार की तीन यूनिट को आधार मानकर वेतन का आकलन किया गया था। इसमें कर्मचारी, उसके जीवनसाथी और एक बच्चे को ही परिवार का हिस्सा माना जाता है। लेकिन बदलते समय के साथ कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह व्यवस्था अब वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। आज के दौर में परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं और महंगाई भी पहले की तुलना में काफी अधिक है।
परिवार की यूनिट बढ़ाने की मांग
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि सैलरी तय करने के लिए परिवार की यूनिट को तीन से बढ़ाकर पांच किया जाए। इसमें माता-पिता को भी परिवार का हिस्सा माना जाए, क्योंकि अधिकतर कर्मचारियों को अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है।
कैसे बढ़ सकती है सैलरी
विशेषज्ञों के अनुसार, जब परिवार की यूनिट में बढ़ोतरी होती है तो न्यूनतम वेतन के निर्धारण में भी बदलाव आता है। अनुमान है कि एक यूनिट बढ़ने से वेतन में करीब 33 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव होती है। यदि परिवार की यूनिट तीन से बढ़ाकर पांच कर दी जाती है, तो कुल मिलाकर लगभग 66 प्रतिशत तक वेतन बढ़ने की संभावना बन सकती है।
एक उदाहरण से समझें
मान लीजिए किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी करीब 78,800 रुपये है और मौजूदा फिटमेंट फैक्टर के अनुसार यह बढ़कर लगभग 1.38 लाख रुपये तक पहुंचती है। लेकिन अगर परिवार की यूनिट पांच कर दी जाती है और फिटमेंट फैक्टर बढ़कर लगभग 2.42 तक पहुंचता है, तो उसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी करीब 1.90 लाख रुपये तक हो सकती है।
सरकार के फैसले का इंतजार
हालांकि अभी यह केवल कर्मचारी संगठनों की मांग और संभावित गणना पर आधारित अनुमान है। सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना तय किया जाएगा और कर्मचारियों की सैलरी में वास्तविक रूप से कितनी बढ़ोतरी होगी।

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