ईंधन अधिभार शुल्क को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा है। उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इस अतिरिक्त शुल्क से बिजली बिल का बोझ बढ़ रहा है, जबकि दूसरी ओर विभागीय स्तर पर भी इस फैसले को लेकर सवाल उठे हैं।
ईंधन अधिभार शुल्क पर उठे सवाल
बिजली बिल के साथ अतिरिक्त शुल्क वसूली को लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने भी आपत्ति जताई है। आयोग की ओर से इसे निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं बताया गया है। इसके बाद उपभोक्ता संगठनों ने सरकार से इस वसूली पर रोक लगाने की मांग की है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि आम ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ना चाहिए और सरकार को इस मामले में स्थिति साफ करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक पर नजर
ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री बिजली व्यवस्था, उपभोक्ताओं की समस्याओं और विभागीय कामकाज की समीक्षा करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान बिजली बिल, अतिरिक्त शुल्क और बिजली आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। बैठक के बाद सरकार की ओर से उपभोक्ताओं के हित में कोई फैसला आने की संभावना जताई जा रही है।
ऊर्जा विभाग में भी उठे है कई विवाद
इस मामले को लेकर विभाग के अंदर भी मतभेद सामने आए हैं। ऊर्जा मंत्री ने बिजली महंगी किए जाने के फैसले को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि महत्वपूर्ण निर्णयों में जरूरी सहमति प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके अलावा विभागीय व्यवस्था और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
उपभोक्ता और कर्मचारी संगठनों की मांग
बिजली उपभोक्ता संगठन चाहते हैं कि ईंधन अधिभार शुल्क की वसूली पर रोक लगाई जाए। वहीं कर्मचारी संगठनों ने बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए हटाए गए संविदा कर्मचारियों की वापसी समेत कई मांगें सरकार के सामने रखी हैं। उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद बिजली बिल और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर कोई राहत भरा निर्णय लिया जा सकता है।

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