दो साल में पूरा होगा कॉरिडोर प्रोजेक्ट
इस महत्वाकांक्षी हाईवे कॉरिडोर को लगभग दो वर्षों में पूरा करने की उम्मीद जताई जा रही है। लोक निर्माण विभाग ने इस परियोजना के तहत अपने हिस्से के दो प्रमुख खंडों पर काम शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। इस परियोजना को राज्य के बुनियादी ढांचे के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है।
कई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा नया हाईवे
यह नया कॉरिडोर शामली–गोरखपुर एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और विंध्य एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा, जिससे यात्रा समय में काफी कमी आएगी।
पूर्वांचल के जिलों को मिलेगा फायदा
इस हाईवे से पूर्वांचल क्षेत्र के कई जिलों को बड़ा लाभ मिलेगा। बेहतर सड़क संपर्क से न सिर्फ आम लोगों की यात्रा आसान होगी, बल्कि व्यापार और उद्योग से जुड़ी गतिविधियों में भी तेजी आने की संभावना है।
दो बड़े हिस्सों पर तेजी से काम की योजना
लोक निर्माण विभाग ने टांडा से सुरहूपुर और शाहगंज से मुंगरा बादशाहपुर तक कुल 94.73 किलोमीटर लंबे हिस्से को अपनी कार्ययोजना में शामिल कर लिया है। इस हिस्से पर करीब 2192 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है।
परियोजना के तहत सड़कों का होगा चौड़ीकरण
परियोजना के तहत कई मौजूदा सड़कों को भी चौड़ा किया जाएगा। टांडा से सुरहूपुर मार्ग को फोर लेन में बदला जाएगा, जिसकी चौड़ाई 14 मीटर होगी। इसी तरह शाहगंज–मुंगरा बादशाहपुर मार्ग को भी आधुनिक हाईवे के रूप में विकसित किया जाएगा।
सीमांचल और नेपाल बॉर्डर क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार
पिपरी से बर्डपुर तक के हिस्से पर पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है और टेंडर प्रक्रिया जारी है। इस पूरे कॉरिडोर के बनने से सीमावर्ती क्षेत्रों और नेपाल बॉर्डर तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बड़ा फायदा मिलेगा

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