एक साल बाद लागू होगा समझौता
यह व्यापार समझौता पिछले वर्ष जुलाई में भारत-ब्रिटेन वार्ता के दौरान अंतिम रूप दिया गया था। अब लगभग एक साल बाद इसे औपचारिक रूप से लागू किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर को दोनों देशों के संबंधों के लिए “ऐतिहासिक उपलब्धि” बताया और कहा कि यह समझौता भारत के आर्थिक विकास को नई गति देगा।
व्यापार और निवेश में आएगी तेजी
इस समझौते के लागू होने के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। अनुमान के अनुसार, द्विपक्षीय व्यापार हर साल करीब 25.5 बिलियन पाउंड तक बढ़ सकता है। इसके साथ ही दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना जताई गई है, जिसमें भारत और ब्रिटेन की जीडीपी में वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
टैरिफ में बड़ी कटौती से उद्योगों को राहत
इस समझौते के तहत कई प्रमुख क्षेत्रों में टैरिफ में बड़ी कटौती की गई है। व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटकर 40% किया जाएगा, ऑटोमोबाइल पर टैरिफ 100% से घटकर 10% हो जाएगा, कॉस्मेटिक्स और अन्य उत्पादों पर भी शुल्क धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा। इन फैसलों से दोनों देशों के उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलने की उम्मीद है।
भारतीय निर्यातकों और MSME को फायदा
भारत के किसानों, मजदूरों, स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को इस समझौते से बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। कपड़ा, जूते, कृषि उत्पाद और अन्य भारतीय वस्तुओं के लिए ब्रिटेन का बाजार और अधिक खुलने जा रहा है। इससे भारतीय निर्यातकों को नए अवसर और बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है।
ब्रिटेन में भी भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी
ब्रिटिश सरकार के अनुसार, भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क कम होने से वहां के उपभोक्ताओं को सस्ते दामों पर अधिक विकल्प मिल सकेंगे। इससे ब्रिटेन में भारतीय वस्तुओं की मांग बढ़ने की संभावना है। इस समझौते में दोनों देशों के पेशेवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा और कार्यकाल से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं।
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