क्यों रद्द हुई स्कूलों की मान्यता?
यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालयों के लिए तय नियमों के अनुसार स्कूलों में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित होना और विद्यार्थियों का बोर्ड परीक्षा में शामिल होना जरूरी है। जिन विद्यालयों में लगातार दो साल तक पढ़ाई नहीं कराई गई, कोई छात्र बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हुआ, उनकी मान्यता माध्यमिक शिक्षा अधिनियम और बोर्ड के नियमों के तहत समाप्त कर दी गई।
बोर्ड ने जारी की स्कूलों की सूची
यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने इस संबंध में सूचना जारी की है। साथ ही सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि अमान्य विद्यालयों की जानकारी विद्यार्थियों और अभिभावकों तक पहुंचाई जाए। इसका उद्देश्य यह है कि छात्र-छात्राएं ऐसे स्कूलों में प्रवेश न लें, जिनकी मान्यता समाप्त हो चुकी है।
विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए सूचना
बोर्ड ने साफ किया है कि हाईस्कूल नवीन (वन टाइम) और इंटरमीडिएट नवीन वर्ग की मान्यता वाले विद्यालयों को भी नियमों का पालन करना होगा। यदि लगातार दो वर्षों तक विद्यालय में पढ़ाई नहीं होती या कोई छात्र परीक्षा में शामिल नहीं होता, तो मान्यता खत्म मानी जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था सुधारने की दिशा में कदम
यूपी बोर्ड की यह कार्रवाई उन विद्यालयों पर निगरानी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे फर्जी तरीके से चल रहे या निष्क्रिय विद्यालयों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। बोर्ड का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था मिले और केवल सक्रिय व मान्यता प्राप्त विद्यालय ही छात्रों को पढ़ाई का अवसर दें।

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