विभाग की ओर से गृह विभाग को पत्र भेजा गया है, जिसकी जानकारी सभी जिलों के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को भी दी गई है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे गीतों के प्रसारण पर नजर रखते हुए जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सार्वजनिक स्थानों पर होगी निगरानी
सरकार के अनुसार, बाजारों, वाहनों, शादी समारोहों, सामाजिक कार्यक्रमों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में कई बार ऐसे गीत बजाए जाते हैं, जिनसे समाज में गलत संदेश जाता है। इन गीतों में अश्लीलता, आपत्तिजनक भाषा या जातीय भावनाओं को भड़काने वाली सामग्री होने से सामाजिक माहौल प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने पर जोर
कला एवं संस्कृति विभाग का कहना है कि समाज में आपसी भाईचारा और शांति बनाए रखना जरूरी है। ऐसे गीत जो लोगों के बीच भेदभाव, विवाद या तनाव पैदा कर सकते हैं, उनके खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने भी स्पष्ट किया कि समाज में अश्लीलता, वैमनस्य और विभाजन को बढ़ावा देने वाली किसी भी प्रवृत्ति को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।
महिलाओं और बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता
विभाग ने कहा है कि इस तरह की सामग्री का सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बच्चों और युवाओं पर पड़ता है। इससे सामाजिक मर्यादाओं को नुकसान पहुंचता है और समाज में नकारात्मक माहौल बन सकता है। सरकार का उद्देश्य बिहार की लोक संस्कृति, लोक कला और लोक भाषाओं की गरिमा को बनाए रखना है। इसी वजह से आपत्तिजनक गीतों के प्रसारण पर रोक लगाने की पहल की गई है।
जिलों में प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस ऐसे मामलों पर नजर रखेंगे
अब जिलों में प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस ऐसे मामलों पर नजर रखेंगे। सरकार का प्रयास है कि सांस्कृतिक आयोजनों में सकारात्मक और मर्यादित सामग्री को बढ़ावा मिले, जिससे बिहार की संस्कृति की पहचान मजबूत बनी रहे।
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