कार्यक्रम के लिए बिहार को चार जोन में विभाजित कर कुल 80 मुखियाओं का चयन किया गया था। इसके बाद विशेषज्ञ पैनल द्वारा मूल्यांकन कर अंतिम रूप से 20 सर्वश्रेष्ठ मुखियाओं का चयन किया गया। चयनित मुखियाओं में सारण और जहानाबाद से तीन-तीन, समस्तीपुर और भागलपुर से दो-दो, जबकि मुजफ्फरपुर, पटना, मधेपुरा, भोजपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, सीवान, गया, औरंगाबाद और बांका से एक-एक मुखिया शामिल रहे।
“गांव बनेगा तो देश बनेगा” - विजय चौधरी
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की सबसे निचली लेकिन सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों के अनुसार भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों के सशक्त होने से ही राज्य और देश का विकास संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में पंचायतों को अन्य राज्यों की तुलना में अधिक अधिकार दिए गए हैं। ढाई लाख से अधिक शिक्षकों की बहाली पंचायत स्तर पर हुई है, जो इस व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
“मुखिया पहले से ज्यादा ताकतवर” - श्रवण कुमार
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि देश में विकास की असली आधारशिला पंचायत सरकार है, जो केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जमीन पर लागू करती है। उन्होंने कहा कि मनरेगा, पीएम आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना और स्वच्छता अभियान जैसी प्रमुख योजनाएं पंचायत स्तर पर ही क्रियान्वित होती हैं। मंत्री ने कहा कि पंचायतों को पहले की तुलना में अधिक अधिकार मिले हैं और मुखियाओं की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर काम के साथ-साथ पारदर्शिता और परिणामों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने विशेष रूप से महिला मुखियाओं को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर देने पर जोर दिया।
पंचायतों की भूमिका पर बढ़ा फोकस
कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि पंचायतें अब केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि विकास की मुख्य धुरी बन चुकी हैं। सरकार का मानना है कि मजबूत पंचायत व्यवस्था ही ग्रामीण विकास को गति दे सकती है और योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंचा सकती है।

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