यूपी में पहले ग्राम प्रधानों को राहत, अब प्रमुखों को भी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर नई व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों को भी इसी तरह की जिम्मेदारी देने की तैयारी चल रही है। पंचायती राज विभाग इस प्रस्ताव पर मंथन कर रहा है। अगर सरकार की मंजूरी मिलती है तो कार्यकाल पूरा होने के बाद मौजूदा ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष पंचायतों की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

जुलाई में खत्म होगा कार्यकाल

प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त होने वाला है। चुनाव में देरी होने की स्थिति में पंचायतों के कामकाज को जारी रखने के लिए प्रशासक नियुक्त करने की जरूरत पड़ेगी। पंचायती राज निदेशालय की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव विभाग को भेजा जा चुका है। अब नियमों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।

ग्राम प्रधानों को मिल चुकी है जिम्मेदारी

इससे पहले उत्तर प्रदेश में पहली बार निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाया गया था। पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने के कारण सरकार ने उन्हें पंचायत के सामान्य कार्यों को संभालने की जिम्मेदारी दी है। हालांकि प्रशासक के तौर पर प्रधानों को सिर्फ नियमित कामकाज की अनुमति है। वे कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं ले सकते।

चुनाव तक जारी रह सकता है पंचायतों का संचालन

माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं। ऐसे में पंचायतों के कामकाज को बिना रुकावट जारी रखने के लिए प्रशासक व्यवस्था लागू की जा सकती है। अगर ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों को भी जिम्मेदारी मिलती है तो यह पंचायत व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा।

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