यूपी में ड्राइविंग लाइसेंस नियमों में बड़ा बदलाव, जानें नए नियम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और नवीनीकरण कराने के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब लाइसेंस प्रक्रिया पहले की तरह आसान नहीं होगी, बल्कि आवेदकों को अत्याधुनिक टेस्टिंग सिस्टम से गुजरना पड़ेगा। खासकर जिन लोगों का डीएल लंबे समय से एक्सपायर है, उन्हें दोबारा ड्राइविंग टेस्ट देना पड़ सकता है।

राजधानी लखनऊ में ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (ADTC) शुरू होने जा रहा है। यहां सेंसर और कैमरों की निगरानी में वाहन चलाने की क्षमता जांची जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य ड्राइविंग टेस्ट को पारदर्शी बनाना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

डीएल नवीनीकरण के लिए देना पड़ सकता है टेस्ट

नए नियमों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस समाप्त हो गया है और उसने समय पर नवीनीकरण नहीं कराया, तो उसे टेस्ट प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। मोटर वाहन नियमों के तहत डीएल एक्सपायर होने के एक साल के अंदर नवीनीकरण कराने पर टेस्ट की जरूरत नहीं होती, लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद दोबारा ड्राइविंग टेस्ट देना जरूरी हो सकता है।

लर्निंग लाइसेंस वालों के लिए भी जरूरी होगा टेस्ट

अब लर्निंग लाइसेंस को स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस में बदलने के लिए वाहन चलाने की परीक्षा देनी होगी। आवेदक को पहले की तरह केवल दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने से डीएल नहीं मिलेगा। परमानेंट डीएल बनवाने से पहले आवेदक की ड्राइविंग क्षमता को ऑटोमेटिक ट्रैक पर जांचा जाएगा।

कार, बाइक और ट्रक के लिए अलग टेस्ट व्यवस्था

ड्राइविंग टेस्ट के दौरान अलग-अलग वाहनों के लिए विशेष ट्रैक बनाए गए हैं। कार चालकों को पार्किंग, चढ़ाई और रिवर्स जैसे कौशल दिखाने होंगे। वहीं दोपहिया और भारी वाहन चलाने वालों के लिए भी अलग-अलग मानकों के आधार पर परीक्षा ली जाएगी।

सेंसर और कैमरे करेंगे ड्राइविंग की निगरानी

नए ड्राइविंग सेंटर में वाहन टेस्ट पूरी तरह तकनीकी तरीके से होगा। ट्रैक पर जगह-जगह सेंसर लगाए गए हैं और कैमरों से हर गतिविधि रिकॉर्ड की जाएगी। आवेदक को तय समय के अंदर ट्रैक पूरा करना होगा। वाहन चलाते समय गलती होने पर सेंसर से संकेत मिलेगा और रिकॉर्डिंग के आधार पर परिणाम तय किया जाएगा।

पहले मैनुअल टेस्ट में आती थीं शिकायतें

अब तक कई जगहों पर ड्राइविंग टेस्ट मैनुअल तरीके से होते थे। इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और पारदर्शिता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। नई ऑटोमेटिक व्यवस्था लागू होने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया ज्यादा निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे केवल सही तरीके से वाहन चलाने वाले लोगों को ही लाइसेंस मिल सकेगा।

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