राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस संबंध में सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार का उद्देश्य लंबे समय से लंबित भूमि रिकॉर्ड के मामलों का जल्द निपटारा करना और लोगों को प्रशासनिक परेशानियों से राहत दिलाना है।
अब सरकार करेगी पहल
अब तक किसी रैयत की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारियों को दाखिल-खारिज और जमाबंदी अपडेट कराने के लिए स्वयं आवेदन करना पड़ता था। कई मामलों में जानकारी की कमी या प्रक्रिया में देरी के कारण वर्षों तक रिकॉर्ड अपडेट नहीं हो पाता था। नई व्यवस्था के तहत प्रशासन खुद ऐसे मामलों की पहचान करेगा और उत्तराधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराएगा। इससे जमीन से जुड़े विवाद कम होने और रिकॉर्ड समय पर अपडेट होने की उम्मीद है।
ऐसे होगी मृत रैयतों की पहचान
राजस्व विभाग के कर्मचारी विभिन्न सरकारी और स्थानीय स्रोतों की मदद से मृत जमाबंदी धारकों की पहचान करेंगे। इसके लिए जन्म-मृत्यु पंजीकरण के रिकॉर्ड, चौकीदार की रिपोर्ट, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी का उपयोग किया जाएगा। पहचान के बाद संबंधित परिवार से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज लिए जाएंगे, ताकि नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
दस्तावेज नहीं होने पर भी आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय में बंटवारे से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पाते हैं, तब भी केवल वैध उत्तराधिकार के आधार पर नामांतरण की कार्रवाई शुरू की जा सकेगी। इससे वर्षों से लंबित मामलों का तेजी से समाधान होने की संभावना है।
जमाबंदी अपडेट की पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
जमाबंदी अपडेट और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों की पूरी प्रक्रिया बिहारभूमि पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित की जाएगी। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी होंगे और प्रक्रिया में लगने वाला समय भी कम होगा।
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