RBI के नए नियम! बैंकों पर शिकंजा, ग्राहकों के लिए 5 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली: बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFC) द्वारा ग्राहकों को जबरन बीमा, म्यूचुअल फंड या अन्य वित्तीय उत्पाद बेचने की शिकायतों को देखते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इनका उद्देश्य ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा करना और बैंकिंग सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना है।

बिना सहमति नहीं बेचा जा सकेगा कोई प्रोडक्ट

नए नियमों के तहत अब बैंक या वित्तीय संस्थान किसी भी ग्राहक को उसकी स्पष्ट सहमति के बिना कोई अतिरिक्त वित्तीय उत्पाद नहीं बेच सकेंगे। यदि किसी ग्राहक को बीमा, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य निवेश योजना की पेशकश की जाती है, तो उसकी अलग से लिखित या डिजिटल मंजूरी लेना जरूरी होगा। यदि एक ही आवेदन पत्र में कई उत्पाद शामिल हैं, तो प्रत्येक उत्पाद के लिए ग्राहक की सहमति अलग-अलग दर्ज करनी होगी। इससे ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार ही विकल्प चुन सकेंगे।

लोन के साथ बीमा खरीदने का दबाव नहीं

RBI ने साफ किया है कि कोई भी बैंक लोन मंजूर करने या अन्य बैंकिंग सुविधा देने के बदले किसी खास बीमा कंपनी या निवेश योजना को खरीदने के लिए ग्राहक पर दबाव नहीं बना सकता। ग्राहकों को अपनी पसंद के अनुसार बीमा कंपनी या निवेश उत्पाद चुनने की पूरी स्वतंत्रता होगी। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिलने की संभावना है।

ग्राहक की जरूरत के अनुसार ही सलाह

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार बैंक और NBFC को किसी भी वित्तीय उत्पाद की सलाह देने से पहले ग्राहक की आय, उम्र, वित्तीय स्थिति, निवेश का उद्देश्य और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करना होगा। यदि ग्राहक की जरूरत और क्षमता से मेल नहीं खाने वाला उत्पाद केवल बिक्री बढ़ाने या कमीशन कमाने के उद्देश्य से बेचा जाता है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

ऑनलाइन बिक्री पर भी रहेगा सख्ती

RBI ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाली बिक्री के लिए भी नए मानक तय किए हैं। अब बैंक या वित्तीय संस्थान वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर ऐसे तरीके इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे, जिनसे ग्राहक अनजाने में किसी उत्पाद के लिए सहमत हो जाए। पहले से टिक किए गए विकल्प बार-बार आने वाले पॉप-अप, छिपे हुए शुल्क और जल्द फैसला लेने का दबाव बनाने वाले डिज़ाइन पर रोक रहेगी। साथ ही, ग्राहक किसी प्रस्ताव को आसानी से अस्वीकार कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उत्पाद रद्द करने की प्रक्रिया भी सरल होगी।

शिकायत करने का मिलेगा अधिकार

यदि किसी ग्राहक को लगता है कि उसके साथ गलत तरीके से बीमा, म्यूचुअल फंड या कोई अन्य वित्तीय उत्पाद बेचा गया है, तो वह संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था में शिकायत दर्ज करा सकता है। जहां किसी नियामक द्वारा अलग समय-सीमा तय नहीं है, वहां ग्राहक 30 दिनों के भीतर शिकायत कर सकता है। शिकायत मिलने के बाद बैंक को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करनी होगी।

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