1. फैमिली यूनिट बढ़ाने की उठी मांग
कर्मचारी संगठनों ने वेतन तय करने में इस्तेमाल होने वाली फैमिली यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5 करने का प्रस्ताव दिया है। उनका तर्क है कि वर्तमान समय में अधिकांश कर्मचारी अपने माता-पिता और कई मामलों में सास-ससुर की भी आर्थिक जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में वेतन निर्धारण के दौरान वास्तविक पारिवारिक खर्च को शामिल किया जाना चाहिए।
2. न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ सकती है
यदि फैमिली यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो न्यूनतम बेसिक वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि इसी आधार पर न्यूनतम वेतन पहले के मुकाबले काफी अधिक तय किया जा सकता है। इससे नए वेतनमान का लाभ सभी पे-लेवल के कर्मचारियों तक पहुंच सकता है।
3. फिटमेंट फैक्टर पर भी रहेगा बड़ा असर
नेशनल काउंसिल (जेसीएम) की ओर से 3.833 फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया गया है। इसी के आधार पर न्यूनतम बेसिक वेतन लगभग 69,000 रुपये किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि यह केवल एक सुझाव है और अंतिम निर्णय वेतन आयोग तथा केंद्र सरकार को लेना है।
4. DA, HRA और TA में भी हो सकती है बढ़ोतरी
बेसिक सैलरी बढ़ने का सीधा असर महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और यात्रा भत्ता (TA) पर भी पड़ता है। यदि नया वेतनमान लागू होता है और बेसिक पे में बढ़ोतरी होती है, तो कर्मचारियों की कुल मासिक आय में भी अच्छी वृद्धि देखने को मिल सकती है।
5. सभी पे-लेवल के कर्मचारियों को मिल सकता है फायदा
प्रस्तावित बदलाव केवल शुरुआती वेतन पाने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि न्यूनतम बेसिक वेतन बढ़ाया जाता है, तो पूरे पे मैट्रिक्स पर उसका प्रभाव पड़ेगा। इससे विभिन्न ग्रेड और पे-लेवल में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन में भी संशोधन संभव है। इसके साथ ही संशोधित वेतन के आधार पर भविष्य में पेंशन की गणना पर भी असर पड़ सकता है।
6. आयोग की बैठकों पर टिकी हैं केंद्रीय कर्मचारियों की नजर
8वां वेतन आयोग फिलहाल विभिन्न मंत्रालयों, कर्मचारी संगठनों और हितधारकों से सुझाव एकत्र कर रहा है। आगामी बैठकों में वेतन, भत्तों, फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। आयोग की सिफारिशों के बाद ही सरकार अंतिम निर्णय लेगी।

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