पेंशन बढ़ाने की उठी मांग
कई कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने न्यूनतम पेंशन में उल्लेखनीय वृद्धि की मांग रखी है। प्रस्ताव के अनुसार न्यूनतम पेंशन को कर्मचारी के अंतिम वेतन या अंतिम 10 महीनों के औसत वेतन के 67 प्रतिशत तक करने की सिफारिश की गई है। यदि इस पर सहमति बनती है तो लाखों पेंशनर्स की मासिक आय में बड़ा इजाफा हो सकता है।
फिटमेंट फैक्टर और डीआर में बदलाव की मांग
यूनियनों ने पेंशन की गणना में इस्तेमाल होने वाले फिटमेंट फैक्टर की समीक्षा करने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही डियरनेस रिलीफ (DR) को और प्रभावी बनाने तथा इसे नई पेंशन संरचना के अनुरूप संशोधित करने की भी मांग की गई है, ताकि महंगाई का असर पेंशनभोगियों पर कम पड़े।
OPS, NPS और UPS में विकल्प देने का सुझाव
पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में से अपनी सुविधा के अनुसार किसी एक योजना का चयन करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों को अपनी जरूरत के अनुसार बेहतर विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा।
उम्र बढ़ने के साथ पेंशन बढ़ाने का भी प्रस्ताव
संगठनों ने यह भी सुझाव दिया है कि बढ़ती उम्र के साथ पेंशन में अतिरिक्त वृद्धि की जाए। प्रस्ताव के अनुसार:
65 वर्ष की आयु के बाद अतिरिक्त पेंशन शुरू हो।
70, 75, 80 और 85 वर्ष की आयु पर चरणबद्ध बढ़ोतरी मिले।
90 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले पेंशनर्स को अंतिम वेतन के 100% तक पेंशन देने पर विचार किया जाए।
अंतिम फैसला केंद्र सरकार के हाथ में
फिलहाल कर्मचारी संगठनों द्वारा रखी गई सभी मांगें सुझाव के रूप में आयोग के समक्ष हैं। इन पर अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों और उसके बाद केंद्र सरकार की स्वीकृति के आधार पर ही होगा। इसलिए पेंशन में किसी भी बदलाव को अभी अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता, लेकिन लाखों पेंशनर्स को भविष्य में राहत मिलने की उम्मीद जरूर बढ़ी है।

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