1. ब्लड प्रेशर और हृदय की जांच
50 वर्ष के बाद हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का जोखिम तेजी से बढ़ता है। इसलिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ईसीजी (ECG) और जरूरत पड़ने पर ईकोकार्डियोग्राफी जैसी जांच करानी चाहिए। यदि परिवार में हृदय रोग का इतिहास है तो डॉक्टर की सलाह पर अन्य जांच भी कराई जा सकती हैं।
2. ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट
मधुमेह (डायबिटीज) अक्सर शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती है। इसलिए 50 वर्ष के बाद फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्ट-प्रांडियल शुगर और HbA1c टेस्ट समय-समय पर कराना जरूरी माना जाता है। इससे रक्त में शुगर का स्तर और पिछले तीन महीनों की औसत स्थिति का पता चलता है।
3. प्रोस्टेट की जांच (PSA Test)
बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। बार-बार पेशाब आना, पेशाब करने में कठिनाई या रात में कई बार उठना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। विशेषज्ञ जोखिम और लक्षणों के आधार पर PSA (Prostate Specific Antigen) जांच की सलाह दे सकते हैं।
4. लिपिड प्रोफाइल टेस्ट
शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ना हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के जरिए अच्छे (HDL) और खराब (LDL) कोलेस्ट्रॉल का स्तर पता चलता है। यदि रिपोर्ट सामान्य नहीं आती है तो खानपान, व्यायाम और जरूरत पड़ने पर दवा से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
5. कैंसर की स्क्रीनिंग
50 वर्ष की आयु के बाद कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक इतिहास और जोखिम कारकों के आधार पर कोलोरेक्टल कैंसर, फेफड़ों के कैंसर (धूम्रपान करने वालों में) या अन्य आवश्यक स्क्रीनिंग टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। समय पर जांच से बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगने की संभावना बढ़ जाती है।
स्वस्थ जीवनशैली भी है उतनी ही जरूरी
केवल मेडिकल जांच ही पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा तनाव कम रखने की भी सलाह देते हैं। इन आदतों को अपनाकर कई गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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