कई जरूरी प्रक्रियाएं अब भी लंबित
पंचायत चुनाव कराने से पहले मतदाता सूची का प्रकाशन, मतदान केंद्रों का निर्धारण और पदवार आरक्षण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं पूरी करना अनिवार्य होता है। लेकिन वर्ष 2026 के छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इन कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। अब तक केवल 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायत क्षेत्रों की आबादी का निर्धारण किया गया है।
निर्वाचन आयोग के सामने नई चुनौती
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के वर्तमान आयुक्त दीपक प्रसाद का कार्यकाल 27 जुलाई 2026 को समाप्त होने वाला है। उन्हें वर्ष 2020 में आयोग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और बाद में उनके कार्यकाल को एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया था। यदि सरकार नए राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति करती है तो नई टीम को चुनाव संबंधी तैयारियों को गति देने में कुछ समय लग सकता है। वहीं यदि नियुक्ति में देरी होती है तो चुनाव कार्यक्रम को समय पर लागू करना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
तीसरे चरण का आरक्षण तय होना बाकी
बिहार पंचायती राज अधिनियम, 2006 के तहत पंचायत चुनाव से पहले जिला स्तर पर सभी पदों का आरक्षण राज्य निर्वाचन आयोग की निगरानी में तय किया जाता है। पहली बार यह प्रक्रिया 2006 में लागू हुई थी, जबकि दूसरी बार 2016 में नए सिरे से आरक्षण का निर्धारण किया गया था। अब तीसरे चरण के तहत फिर से पंचायत प्रतिनिधियों के पदों का आरक्षण तय किया जाना है। राज्यभर में लगभग 2.5 लाख पंचायत पदों के लिए आरक्षण निर्धारण होना बाकी है, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी अहम
आरक्षण प्रक्रिया में अति पिछड़ा वर्ग (EBC) से जुड़े प्रावधानों का भी पालन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार राजनीतिक पिछड़ेपन का अध्ययन और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया जा सकता है। इसी प्रकार की कानूनी प्रक्रिया के कारण वर्ष 2022 में बिहार नगर निकाय चुनाव भी लगभग दो महीने की देरी से शुरू हो सके थे।
नए निकायों में भी कराना होगा चुनाव
नए राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के बाद आयोग को केवल पंचायत चुनाव ही नहीं, बल्कि नवगठित नगर निकायों में भी चुनावी प्रक्रिया शुरू करनी होगी। ऐसे में आयोग के सामने एक साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी, जिनका असर पंचायत चुनाव की समय-सीमा पर पड़ सकता है।
समय पर चुनाव को लेकर बढ़ी अनिश्चितता
चुनाव से जुड़ी कई अहम तैयारियां अभी शुरुआती चरण में भी नहीं पहुंची हैं। आरक्षण निर्धारण, मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन, मतदान केंद्रों का गठन और प्रशासनिक तैयारियां पूरी होने में समय लगना तय माना जा रहा है। ऐसे में राजनीतिक हलकों और प्रशासनिक स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि पंचायत चुनाव निर्धारित कार्यक्रम से आगे भी खिसक सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसला राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार की आगामी तैयारियों पर निर्भर करेगा।

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