सरकार खुद करेगी उत्तराधिकारियों की पहचान
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों की पहचान अभियान चलाकर की जाए। राजस्व कर्मचारी गांव-गांव जाकर उन जमीनों का पता लगाएंगे, जिनके मूल जमाबंदीधारक का निधन हो चुका है। उपलब्ध अभिलेखों और स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
दस्तावेज नहीं होने पर भी रुकेगा नहीं काम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि उत्तराधिकारियों के पास बंटवारे से जुड़े दस्तावेज तुरंत उपलब्ध नहीं हैं, तब भी केवल वैध उत्तराधिकार के आधार पर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। अधिकारियों द्वारा जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, चौकीदार की रिपोर्ट, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के आधार पर आवश्यक जांच की जाएगी। इसके बाद संबंधित उत्तराधिकारियों से संपर्क कर आगे की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
नियमित समीक्षा, लापरवाही पर कार्रवाई
सरकार ने इस अभियान को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने का फैसला किया है। अंचल अधिकारी हर महीने प्रगति की समीक्षा करेंगे, जबकि उच्च अधिकारी भी नियमित रूप से कार्यों की निगरानी करेंगे। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या तय लक्ष्य पूरा नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
हर माह तय लक्ष्य पूरा करना होगा
नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक राजस्व कर्मचारी को अपने क्षेत्र के प्रत्येक मौजा में हर महीने कम से कम पांच ऐसे मामलों का निस्तारण करना होगा, जिनमें मृत जमाबंदीधारकों के नाम अभी तक रिकॉर्ड में दर्ज हैं। यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक संबंधित क्षेत्र के सभी लंबित मामलों का समाधान नहीं हो जाता। इस कार्य की निगरानी संबंधित अंचल अधिकारी करेंगे।
पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
दाखिल-खारिज से जुड़ी पूरी कार्रवाई बिहारभूमि पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित की जाएगी। इससे रिकॉर्ड अपडेट करने में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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