बांकीपुर सीट पर क्यों है सबकी नजर?
बांकीपुर विधानसभा सीट राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस सीट पर वर्षों से भारतीय जनता पार्टी का दबदबा रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर का यहां से चुनाव लड़ने का फैसला केवल एक उम्मीदवार का चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि भाजपा के मजबूत जनाधार को चुनौती देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सीट खाली होने की वजह
बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया, जिसके चलते उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। नितिन नवीन लगातार कई चुनावों में इस सीट से जीत दर्ज कर चुके हैं और उन्हें यहां का मजबूत नेता माना जाता है।
भाजपा बनाम जनसुराज की टक्कर?
फिलहाल जनसुराज ने अपने उम्मीदवार के रूप में प्रशांत किशोर के नाम की घोषणा कर दी है, जबकि अन्य प्रमुख दलों ने अभी तक अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। ऐसे में शुरुआती तस्वीर भाजपा और जनसुराज के बीच सीधी राजनीतिक टक्कर की बनती दिखाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मुकाबला इसी स्वरूप में रहता है तो यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार की आगामी राजनीति की दिशा तय करने वाला संकेत भी माना जाएगा।
चुनाव आयोग ने जारी किया कार्यक्रम
चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया तय समयसीमा के अनुसार पूरी होगी।
नामांकन की अंतिम तिथि: 13 जुलाई
नामांकन पत्रों की जांच: 14 जुलाई
नामांकन वापसी की अंतिम तिथि: 16 जुलाई
मतदान: 30 जुलाई
मतगणना: 3 अगस्त
चुनावी प्रक्रिया पूर्ण: 4 अगस्त
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