सऊदी की एयर पावर को मिलेगा नया विकल्प
सऊदी अरब लंबे समय से F-35 हासिल करने में रुचि दिखाता रहा है। अगर सौदा अंतिम रूप लेता है तो रियाद की वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों की क्षमता मिलेगी। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इससे सऊदी अरब की हवाई सुरक्षा और संभावित खतरों से निपटने की क्षमता मजबूत होगी।
इजरायल और चीन को लेकर भी नजर
F-35 को लेकर इस सौदे का क्षेत्रीय असर भी चर्चा में है। अभी मध्य पूर्व में इजरायल F-35 का इस्तेमाल करने वाला देश है। अमेरिका ने कहा है कि प्रस्तावित बिक्री से क्षेत्र का सैन्य संतुलन नहीं बदलेगा और इजरायल की सैन्य बढ़त बनाए रखने की उसकी नीति जारी रहेगी। वहीं, कुछ अमेरिकी अधिकारियों और सांसदों ने चीन तक संवेदनशील सैन्य तकनीक पहुंचने की आशंका पर सवाल उठाए हैं। सऊदी अरब और चीन के बढ़ते रक्षा संबंधों के कारण इस पहलू पर विशेष निगरानी की जा रही है।
हूती संघर्ष के बीच बढ़ी अहमियत
यह फैसला ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब यमन के हूती विद्रोहियों से जुड़े सुरक्षा खतरे का सामना कर रहा है। हाल में हूती हमलों और ड्रोन गतिविधियों ने सऊदी सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। एक ड्रोन को सऊदी एयर डिफेंस द्वारा गिराए जाने के बाद उसके मलबे से एक व्यक्ति की मौत और दो लोगों के घायल होने की भी रिपोर्ट सामने आई है।
अभी अंतिम डील बाकी
विदेश विभाग की मंजूरी के बाद प्रस्ताव अब अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया में जाएगा। अंतिम कीमत, विमानों की संख्या और डिलीवरी का समय आगे की बातचीत पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल इसे संभावित बिक्री की मंजूरी के रूप में देखना सही होगा, न कि विमानों की तत्काल डिलीवरी के रूप में।

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