दो चरणों में मिलता है अनुदान
इस योजना का उद्देश्य केवल गाय खरीदने में मदद करना नहीं, बल्कि व्यवस्थित डेयरी यूनिट तैयार करने में पशुपालकों को आर्थिक सहारा देना है। स्वीकृत अनुदान निर्धारित नियमों के अनुसार दो चरणों में लाभार्थी के बैंक खाते में DBT के जरिए भेजा जाता है।
इन नस्लों की गायों पर जोर
योजना में साहीवाल, गिर और थारपारकर जैसी उन्नत स्वदेशी नस्लों की 10 दुधारू गायों की यूनिट का प्रावधान है। योजना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर है और 50 प्रतिशत लाभ महिला पशुपालकों व दुग्ध उत्पादकों को देने का प्रावधान बताया गया है।
जमीन और अनुभव भी जरूरी
आवेदन करने वाले व्यक्ति के पास पशुपालन का कम से कम तीन साल का अनुभव होना चाहिए। डेयरी यूनिट के लिए करीब 0.20 एकड़ जमीन और सालभर हरे चारे की व्यवस्था भी जरूरी है। यानी आवेदन से पहले पशुओं के रहने, चारे और देखभाल की पूरी व्यवस्था तैयार रखना जरूरी होगा।
2026-27 का लक्ष्य भी जारी
मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लक्ष्य से जुड़ी सूचना भी जारी की जा चुकी है। इच्छुक पशुपालकों को आवेदन से पहले अपने जिले का लक्ष्य, पात्रता और अन्य मौजूदा नियम जरूर देख लेने चाहिए।

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