पहले तैयार होगी गाइडलाइन
पंचायती राज विभाग की विशेषज्ञ टीम EBC आरक्षण का आधार तय करने के लिए मानक तैयार कर रही है। इन मानकों के तैयार होने के बाद उन्हें अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग के पास भेजा जाएगा। आयोग आंकड़ों और सामाजिक स्थिति का अध्ययन करके सरकार को अपनी सिफारिश देगा। इसके बाद ही आरक्षण का अंतिम ढांचा सामने आएगा।
50% की सीमा से समझिए पूरा गणित
SC, ST और EBC के आरक्षण को मिलाकर कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इसलिए EBC का हिस्सा पहले से तय एक समान प्रतिशत नहीं होगा। पहले SC और ST के लिए निर्धारित आरक्षण को ध्यान में रखा जाएगा और 50 प्रतिशत की सीमा में बची जगह के आधार पर EBC का हिस्सा तय किया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर किसी पंचायत में SC-ST के लिए 40 प्रतिशत आरक्षण बनता है तो 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर बचा 10 प्रतिशत हिस्सा EBC के लिए उपलब्ध हो सकता है। इस वजह से अलग-अलग पंचायतों में EBC आरक्षण की स्थिति अलग हो सकती है।
सिर्फ आबादी ही नहीं, प्रतिनिधित्व भी
आरक्षण तय करते समय पंचायतवार EBC आबादी के साथ उनकी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति पर भी नजर रहेगी। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि अलग-अलग स्तरों पर EBC वर्ग को अब तक कितना राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला है। आयोग यह जांच भी कर सकता है कि आरक्षण का लाभ EBC की विभिन्न जातियों तक समान रूप से पहुंचा या कुछ समूहों तक ही सीमित रहा।
करीब 122 जातियां EBC सूची में
बिहार की EBC सूची में करीब 122 जातियां शामिल हैं। इनमें धानुक, तेली, मल्लाह, कानू और कहार जैसी जातियां भी आती हैं। ऐसे में आरक्षण का आकलन करते समय अलग-अलग समूहों के प्रतिनिधित्व और स्थिति को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।
अंतिम फैसला अभी बाकी
गाइडलाइन तैयार होने के बाद आयोग की रिपोर्ट और सरकार के निर्णय से आरक्षण की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी। इसके बाद निर्वाचन प्रक्रिया में आरक्षित सीटों का निर्धारण आगे बढ़ेगा। यानी फिलहाल EBC के लिए किसी निश्चित प्रतिशत की घोषणा नहीं हुई है और अंतिम फैसला पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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