12 साल बाद बढ़ी वेतन सीमा
EPFO की मौजूदा वेतन सीमा सितंबर 2014 से 15,000 रुपये प्रति माह निर्धारित थी। लंबे समय बाद इसमें 10,000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। सरकार के इस फैसले से ऐसे कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का लाभ मिलने का रास्ता खुलेगा, जिनका वेतन पहले तय सीमा से अधिक होने के कारण अनिवार्य कवरेज के दायरे से बाहर था।
वेतन के साथ पेंशन पर भी असर
EPFO के तहत मिलने वाली सुविधाओं में भविष्य निधि के साथ कर्मचारी पेंशन योजना भी शामिल है। श्रम मंत्रालय के दस्तावेज के मुताबिक मौजूदा वेतन सीमा का संबंध EPS सदस्यता और सरकार के 1.16 प्रतिशत योगदान से भी है। नई सीमा लागू होने के बाद पात्र कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ने की उम्मीद है। इससे कर्मचारियों को नौकरी के दौरान PF बचत के साथ भविष्य की पेंशन संबंधी सुरक्षा में भी लाभ मिल सकता है।
कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला?
वेतन सीमा बढ़ने का सीधा मतलब है कि EPFO के दायरे में आने वाले कर्मचारियों का आधार बढ़ सकता है। सरकार पहले से ही EPFO कवरेज का विस्तार करने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है। अगस्त 2026 में EPFO ने ऐसे पात्र कर्मचारियों को शामिल करने के लिए Employees' Enrolment Campaign 2026 की जानकारी भी जारी की थी, जो पहले EPF कवरेज से बाहर रह गए थे।
इस बदलाव से कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि और पेंशन से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ेगा।

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