चलते सैन्य काफिले को मिलेगा एयर कवर
QRSAM की खासियत इसका मोबाइल डिजाइन है। इसे सैन्य वाहनों के साथ तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। इसका उद्देश्य ऐसी स्थिति में एयर डिफेंस उपलब्ध कराना है, जब सेना की बख्तरबंद या अन्य सैन्य टुकड़ियां लगातार आगे बढ़ रही हों।
मौजूदा सिस्टम हवाई खतरों की खोज और ट्रैकिंग के लिए रडार का इस्तेमाल करता है। खतरा सामने आने पर मिसाइल दागकर उसे रोकने की कोशिश की जा सकती है। यही मोबाइल क्षमता QRSAM को पारंपरिक स्थिर एयर डिफेंस सिस्टम से अलग बनाती है।
QRSAM-ER से बढ़ सकता है सुरक्षा का दायरा
QRSAM की मौजूदा परिचालन सीमा करीब 30 किलोमीटर बताई जाती है। अब इसका बड़ा रेंज संस्करण के जरिए इस दायरे को और बढ़ाने पर ध्यान है। कुछ रिपोर्टों में QRSAM-ER की संभावित रेंज 60 से 80 किलोमीटर और ऊंचाई क्षमता 10 से 12 किलोमीटर के आसपास होने की संभावना जताई गई है। हालांकि इन आंकड़ों को अंतिम आधिकारिक क्षमता नहीं माना जाना चाहिए।
फाइटर जेट और ड्रोन जैसे खतरों पर नजर
ऐसी प्रणाली का इस्तेमाल संभावित तौर पर लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और UAV जैसे हवाई लक्ष्यों के खिलाफ किया जा सकता है। लंबी दूरी का संस्करण विकसित होने पर एयर डिफेंस यूनिट को खतरे पर पहले प्रतिक्रिया देने के लिए ज्यादा समय और दूरी मिल सकती है।
भारत के बहुस्तरीय एयर डिफेंस में एक और परत
QRSAM-ER की वास्तविक क्षमता और अंतिम तकनीकी डिजाइन आधिकारिक परीक्षणों और घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगे। लेकिन बढ़ा रेंज क्षमता सफल रहती है तो यह भारतीय सेना की मोबाइल एयर डिफेंस व्यवस्था को मजबूत कर सकती है। खासतौर पर आगे बढ़ती सैन्य टुकड़ियों के लिए जमीन के साथ-साथ आसमान से सुरक्षा देने वाली व्यवस्था का दायरा बढ़ सकता है।

0 comments:
Post a Comment