आधे वजन में बड़ी ताकत
BrahMos-NG का वजन करीब 1.2 से 1.5 टन रखने की योजना है, जबकि मौजूदा ब्रह्मोस का वजन लगभग 3 टन के आसपास है। करीब 5 मीटर लंबी यह मिसाइल आकार में छोटी होने के बावजूद सुपरसोनिक गति हासिल करने के लिए डिजाइन की जा रही है। शुरुआती वेरिएंट की रेंज करीब 290 से 300 किलोमीटर बताई गई है।
लड़ाकू विमानों के लिए अहम
इस मिसाइल की सबसे खास बात इसका हल्का डिजाइन है। इससे इसे LCA तेजस जैसे अपेक्षाकृत हल्के लड़ाकू विमानों के साथ जोड़ने की संभावना बढ़ती है। इसके अलावा राफेल और सुखोई-30MKI जैसे प्लेटफॉर्म के लिए भी इसकी उपयोगिता बताई जा रही है।
आधुनिक तकनीक पर जोर
BrahMos-NG में कम आकार के साथ आधुनिक एवियोनिक्स और सेंसर तकनीक शामिल करने पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मिसाइल को ज्यादा स्मार्ट और विभिन्न प्लेटफॉर्म के अनुकूल बनाना है। भविष्य में इसके अलग-अलग संस्करणों को जमीन, समुद्र और हवा से इस्तेमाल करने की संभावनाएं भी बताई गई हैं।
रक्षा उत्पादन को भी मिलेगा बढ़ावा
BrahMos-NG का विकास केवल सैन्य क्षमता से जुड़ा प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि इससे देश में रक्षा निर्माण और मिसाइल उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश के डिफेंस कॉरिडोर में इसके संभावित उत्पादन से स्थानीय स्तर पर रक्षा उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

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