भारत का बड़ा कदम, अमेरिका की उड़ी नींद, रूस खुश!

नई दिल्ली। रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार चर्चा के केंद्र में है। इसकी सबसे बड़ी वजह खरीद की मात्रा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक रूस भारत के लिए कच्चे तेल का एक अहम सप्लायर बन चुका है। ऐसे में रूस से होने वाली तेल खरीद पर अमेरिकी संभावित प्रतिबंधों का मुद्दा भारत के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।

रूस से करीब 40.8 अरब डॉलर का तेल

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत ने रूस से करीब 40.8 अरब डॉलर यानी लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल खरीदा। यह भारत के कुल 134.7 अरब डॉलर के क्रूड ऑयल आयात का करीब 30.3 प्रतिशत था। यानी भारत के विदेश से खरीदे गए हर 100 डॉलर के कच्चे तेल में करीब 30 डॉलर की हिस्सेदारी रूस की रही।

जुलाई तक और बढ़ गई रूस की हिस्सेदारी

रूस से तेल खरीद की अहमियत इस आंकड़े से भी समझी जा सकती है कि जुलाई 2026 तक भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 51 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। हालांकि, महीने-दर-महीने आयात की मात्रा में बदलाव होता रहता है। हालिया बाजार आंकड़ों में अगस्त में भारत का रूसी क्रूड आयात जुलाई की तुलना में कम रहने का अनुमान भी सामने आया है।

भारत के लिए क्यों अहम है रूसी तेल?

रूस से मिलने वाले कच्चे तेल ने भारतीय रिफाइनरों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर कच्चा माल उपलब्ध कराया है। इससे भारत के कुल तेल आयात खर्च को नियंत्रित रखने में मदद मिली है। चूंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है, इसलिए कीमत और सप्लाई दोनों देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

अब अमेरिका की नजर इसी खरीद पर

अमेरिका में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से जुड़ी पहल के बीच भारत की इतनी बड़ी रूसी तेल खरीद चर्चा में है। हालांकि, भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ अभी अपने आप लागू नहीं हुआ है। किसी भी संभावित शुल्क का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी नीति किस रूप में लागू होती है और किन देशों व उत्पादों को उसके दायरे में रखा जाता है।

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