यह कोर्स खास तौर पर उन कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के लिए है, जिनके पास B.Ed. की डिग्री है, लेकिन D.El.Ed. की योग्यता नहीं है और जिनकी नियुक्ति निर्धारित अवधि के दौरान प्राथमिक कक्षाओं में हुई थी। इसका उद्देश्य शिक्षकों को कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों की जरूरतों के अनुरूप बेहतर और बाल-केंद्रित तरीके से पढ़ाने के लिए जरूरी प्रशिक्षण देना है।
कोर्स में क्या होगा?
ब्रिज कोर्स में छह सैद्धांतिक विषयों के साथ स्कूल आधारित प्रायोगिक प्रशिक्षण शामिल है। इसमें कम से कम 10 दिन की ऑनलाइन संपर्क कक्षाएं और 20 दिन का स्कूल आधारित प्रशिक्षण रखा गया है। पढ़ाई हिंदी और अंग्रेजी में होगी, जबकि थ्योरी परीक्षा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से किसी भाषा में दी जा सकेगी।
इस पहल की पृष्ठभूमि सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल 2024 के आदेश से जुड़ी है, जिसमें ऐसे संरक्षित B.Ed.-योग्य प्राथमिक शिक्षकों के लिए ब्रिज कोर्स तैयार करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि संबंधित शिक्षकों को निर्धारित समय में कोर्स पूरा करना होगा।
इस कोर्स के जरिए संबंधित शिक्षकों को प्राथमिक स्तर की शिक्षा के लिए जरूरी अतिरिक्त प्रशिक्षण और प्रमाणन हासिल करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी पेशेवर क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

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