बाइक, ऑटो और कैब की सुविधा
प्रस्तावित व्यवस्था में यात्रियों को बाइक, ऑटो और कैब जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर है। खास बात यह होगी कि मांग बढ़ने या पीक टाइम में किराये में अचानक बढ़ोतरी न हो। इससे अस्पताल, बाजार, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और जिला मुख्यालय जाने वाले लोगों को अधिक स्थिर किराये में यात्रा का विकल्प मिल सकेगा।
पैक्स के जरिए गांवों तक पहुंचेगी सेवा
भारत टैक्सी को केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित न रखकर गांवों तक ले जाने के लिए प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के नेटवर्क का इस्तेमाल करने की योजना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय आवागमन की सुविधा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
ड्राइवर भी होंगे कारोबार में हिस्सेदार
इस मॉडल में टैक्सी चालकों को सिर्फ सेवा देने वाले व्यक्ति के बजाय सहकारी कारोबार में भागीदार बनाने की अवधारणा है। जीरो कमीशन मॉडल के तहत प्रति यात्रा प्लेटफॉर्म कमीशन की कटौती से बचाने और चालकों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। इससे यात्रियों के साथ-साथ वाहन चालकों को भी इस मॉडल का सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

0 comments:
Post a Comment