इस आयोजन की शुरुआत विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर होना भी खास रहा। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए निर्माण और सृजन की भारतीय परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने विश्वकर्मा को निर्माण-कौशल और रचनात्मकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के दौर में यही सोच भारत की नई विकास यात्रा से जुड़ रही है।
परंपरा से आधुनिक तकनीक तक का सफर
प्रधानमंत्री के संबोधन का एक प्रमुख संदेश यह रहा कि भारत अपनी पुरानी निर्माण परंपरा को अब अत्याधुनिक तकनीक के साथ जोड़ रहा है। एक ओर देश की सदियों पुरानी शिल्प और निर्माण संस्कृति है, तो दूसरी ओर सेमीकंडक्टर जैसी अत्याधुनिक तकनीक। इसी मेल को उन्होंने आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा से जोड़ा।
सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ रहा भारत का दायरा
SEMICON India 2026 की थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक: इकोसिस्टम का निर्माण’ रखी गई है। सरकार के मुताबिक इस आयोजन में 600 से अधिक प्रदर्शक, 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हो रहे हैं। इसका उद्देश्य निवेश, तकनीकी सहयोग, शोध और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देना है।
भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ाने के लिए अब तक 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और तीन परियोजनाओं में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है। सरकार ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के अगले चरण के लिए Semicon 2.0 को भी मंजूरी दी है।
दरअसल, SEMICON India 2026 भारत की उस कोशिश को सामने रखता है जिसमें देश चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग और टेस्टिंग तक एक मजबूत घरेलू इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विश्वकर्मा जयंती के दिन इस आयोजन की शुरुआत ने परंपरा और तकनीक के इस मेल को एक खास संदेश भी दिया।

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