बारिश का पानी जमीन के भीतर पहुंचाने की तैयारी
इस परियोजना का मुख्य मकसद बारिश के पानी को बेकार बहने से रोकना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पुराने नदी मार्ग में मौजूद रेत और कंकड़ की परतें पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने के लिए अनुकूल हो सकती हैं। इसके जरिए बारिश के पानी को भूजल भंडार तक पहुंचाने के संभावित स्थानों पर काम किया जाएगा।
साल 2022 में शुरू हुई थी जांच
इस पुराने नदी मार्ग की तलाश के लिए पहला सर्वे वर्ष 2022 में कराया गया था। इसके बाद राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआइ) की मदद से भूभौतिकीय तकनीकों और बोरहोल जांच के जरिए इसके बारे में जानकारी जुटाई गई। अब परियोजना को अगले चरण में ले जाने की तैयारी है।
छह जगहों पर शुरू हुआ काम
पहले चरण में कानपुर, फतेहपुर और कौशांबी के छह स्थानों को चुना गया है। पूरे अध्ययन में 150 से ज्यादा संभावित साइट सामने आई हैं। इन स्थानों पर किए जा रहे पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों के आधार पर आगे दूसरे क्षेत्रों में भी योजना बढ़ाई जा सकती है।
तीन साल में पूरी होगी परियोजना
भूगर्भ जल विभाग इस काम को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के सहयोग से आगे बढ़ाएगा, जबकि एनजीआरआइ तकनीकी सहायता देगा। परियोजना की अवधि करीब तीन वर्ष रखी गई है। साथ ही वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए यह जानने की कोशिश भी होगी कि यह पुराना नदी मार्ग आखिर कितने समय पहले सक्रिय रहा होगा।

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