31 अक्टूबर तक चलेगा अभियान
यह अभियान मंगलवार से मिशन मोड में शुरू हुआ है और 31 अक्टूबर तक चलेगा। विभाग का लक्ष्य करीब 90 लाख जमाबंदियों में मौजूद कमियों को दूर करना है। बिहार में लगभग साढ़े चार करोड़ जमाबंदियां दर्ज हैं, जिनमें बड़ी संख्या में रिकॉर्ड अधूरे या त्रुटिपूर्ण बताए जा रहे हैं।
किन रिकॉर्ड में होगा सुधार?
अभियान के तहत डिजिटल जमाबंदी की जानकारी को पुराने रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, जमीन का रकबा और लगान में अंतर मिलने पर उसे नियमानुसार दुरुस्त किया जाएगा। शून्य रकबा, शून्य लगान या गायब जानकारी वाले रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में रहेंगे।
मृत व्यक्ति के नाम की जमाबंदी अपडेट
कई जमीनों की जमाबंदी अभी भी ऐसे लोगों के नाम पर दर्ज है जिनका निधन हो चुका है। ऐसे मामलों में वैध उत्तराधिकारियों की पहचान और वंशावली तैयार कर नियम के अनुसार उत्तराधिकार नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
डीएम से लेकर सीओ तक करेंगे निगरानी
अभियान को समय पर पूरा कराने के लिए जिला और अंचल स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। डीएम और कमिश्नर इसकी निगरानी करेंगे, जबकि सीओ को काम की प्रगति की नियमित रिपोर्ट देनी होगी।
इस नई व्यवस्था से जमीन मालिकों को क्या फायदा?
रिकॉर्ड सही होने से जमीन की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और बैंक से संबंधित कामों में आसानी हो सकती है। सही जमाबंदी से भूमि विवादों को कम करने और सर्वे जैसे कामों को व्यवस्थित करने में भी मदद मिल सकती है। इसलिए जमीन मालिकों के लिए अपने भूमि रिकॉर्ड की जानकारी जांच लेना उपयोगी रहेगा।

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