गांवों में बनेंगी 'पेंशन सखी'
इस पहल के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की प्रशिक्षित महिलाओं और सामुदायिक कार्यकर्ताओं को 'पेंशन सखी' के रूप में तैयार किया जाएगा। इनका काम लोगों को पेंशन योजनाओं की जानकारी देना, NPS खाता खोलने की प्रक्रिया समझाना और जरूरत पड़ने पर आगे की सहायता करना होगा। इससे ग्रामीण महिलाओं, छोटे कारोबारियों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े लोगों को पेंशन व्यवस्था समझने में मदद मिलेगी।
SHG नेटवर्क से बढ़ेगी पहुंच
इस अभियान के लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा। बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (BC) सखियां और अन्य प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ता ग्रामीण परिवारों तक पेंशन से जुड़ी जानकारी पहुंचाने में भूमिका निभाएंगे।
डिजिटल माध्यम से होगी निगरानी
पेंशन सखियों के काम और इस पहल की प्रगति पर नजर रखने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, मोबाइल और वेब आधारित सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे यह जानकारी भी जुटाई जा सकेगी कि किन क्षेत्रों में कितने लोगों तक पेंशन योजनाओं की जानकारी पहुंची और कितने नए खाते खुले।
NPS की जानकारी गांव-गांव पहुंचाने पर जोर
सरकार और PFRDA का जोर ग्रामीण परिवारों में रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर है। खासकर महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े सदस्यों को पेंशन योजनाओं से जोड़ने की दिशा में ‘पेंशन सखी’ मॉडल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन बढ़ाने के साथ लोगों को भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए बेहतर तैयारी के प्रति जागरूक करना है।

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