यूपी के गांव-गांव में बड़ा अभियान, प्रधान को मिली नई जिम्मेदारी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के लिए सरकार ने एक नई और प्रभावी पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वर्ष 2030 तक प्रदेश का हरित आवरण 15 प्रतिशत तक बढ़ाने के लक्ष्य के साथ गांवों में ग्रीन चौपालों का गठन किया जा रहा है। इस पहल के तहत ग्राम प्रधान को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा सके।

पौधरोपण को जनभागीदारी से जोड़ने की पहल

वन विभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण को भी सुनिश्चित करना है। ग्रीन चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों को पौधरोपण अभियानों से जोड़ा जा रहा है और उन्हें इसकी तैयारी से लेकर निगरानी तक की जिम्मेदारी दी जा रही है। अब तक प्रदेश के 14,318 गांवों में ग्रीन चौपालों का गठन और आयोजन किया जा चुका है। इन बैठकों में वर्ष 2026 में प्रस्तावित पौधरोपण अभियानों पर चर्चा की जा रही है और यह तय किया जा रहा है कि किस स्थान पर, किस प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे।

ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में होगा संचालन

ग्रीन चौपाल का संचालन ग्राम पंचायत स्तर पर किया जा रहा है। इसके अध्यक्ष ग्राम प्रधान होंगे, जबकि वन विभाग के सेक्शन या बीट अधिकारी को सदस्य सचिव बनाया गया है। ग्राम पंचायत सचिव को चौपाल का संयोजक नियुक्त किया गया है, जिससे प्रशासनिक और जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय हो सके।

चौपाल में ग्राम पंचायत के तीन सदस्य (जिनमें कम से कम एक महिला अनिवार्य है), स्वयं सहायता समूह की महिला प्रतिनिधि, प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक, आंगनबाड़ी सहायिका, प्रगतिशील किसान, पर्यावरण विशेषज्ञ या स्थानीय एनजीओ तथा जैव विविधता प्रबंधन समिति के प्रतिनिधि को शामिल किया गया है।

महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी

ग्रीन चौपालों का एक प्रमुख उद्देश्य समाज के हर वर्ग को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना है। महिलाएं, युवा और बुजुर्ग इन बैठकों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। इससे न केवल जागरूकता बढ़ रही है, बल्कि गांवों में सामूहिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है।

नियमित बैठक और उत्कृष्ट कार्यों को मिलेगा सम्मान

वन विभाग के अनुसार प्रत्येक ग्रीन चौपाल की कम से कम एक बैठक प्रति माह आयोजित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही बेहतर कार्य करने वाली चौपालों को चिन्हित कर उन्हें प्रोत्साहित भी किया जाएगा, जिससे गांवों के बीच सकारात्मक प्रतिस्पर्धा पैदा हो सके।

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