रेपो रेट का क्या हैं?
दरअसल, रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देती है। जब यह दर कम होती है तो बैंक अपने ग्राहकों को भी कर्ज सस्ते में प्रदान कर सकते हैं। वर्तमान निर्णय से अर्थव्यवस्था एक संतुलित स्थिति (Goldilocks Economy) में बनी रहेगी, जहां न तो अर्थव्यवस्था अधिक गर्म है और न ही सुस्त।
MPC का सर्वसम्मत निर्णय
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने तीन दिवसीय बैठक के बाद सर्वसम्मति से रेपो रेट को वर्तमान स्तर पर बनाए रखने का निर्णय लिया। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि केंद्रीय बैंक का रुख फिलहाल तटस्थरहेगा। इसका मतलब है कि भविष्य में आर्थिक और मुद्रास्फीति के आंकड़ों के आधार पर दरों में वृद्धि या कटौती की संभावना खुली रहेगी।
बाजार और कर्जदारों पर प्रभाव
ब्याज दरों में स्थिरता से रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर को लाभ होगा क्योंकि कर्ज सस्ता बना रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उपभोग बढ़ेगा और निवेश में तेजी आएगी। पिछली रेपो कटौतियों का प्रभाव बैंकों के ब्याज दरों पर धीरे-धीरे देखा गया है, और अब यह स्थिरता निवेशकों और कर्जदारों दोनों के लिए सकारात्मक संकेत देती है।
आर्थिक संकेत और जीडीपी अनुमान
केंद्रीय बैंक ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर (GDP) का अनुमान संशोधित किया है। पहली तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.9% और दूसरी तिमाही के लिए 7% रहने का अनुमान है। इसके अलावा, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर का अनुमान 2.1% रखा गया है, जो आम जनता के लिए राहत की खबर है।
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