यह परियोजना यूपी का दूसरा और पूर्वी क्षेत्र का पहला हाईवे होगी, जिसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इससे पहले प्रदेश में केवल जेवर एयरपोर्ट को जोड़ने वाला मार्ग ही हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनाया गया था।
लखनऊ, पूर्वांचल और नेपाल के बीच आवागमन
इस हाईवे के बनने से लखनऊ, पूर्वांचल और नेपाल के बीच यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम और तेज होगी। परिवहन लागत और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे व्यापार और पर्यटन को सीधा लाभ मिलेगा। सीमा से जुड़े क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
छह लेन जमीन पर बनेगा फोरलेन एक्सप्रेसवे
परियोजना की खास बात यह है कि छह लेन के लिए भूमि अधिग्रहण कर बीच में फोरलेन एक्सप्रेसवे विकसित किया जाएगा, जिसे भविष्य में जरूरत के अनुसार विस्तारित किया जा सकेगा। हाईवे को आधुनिक मानकों के अनुरूप डिजाइन किया जाएगा।
इन जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
इस महत्वाकांक्षी परियोजना से बाराबंकी, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर और श्रावस्ती जिले सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। ये जिले अब बेहतर सड़क संपर्क के जरिए औद्योगिक निवेश, व्यापार और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर सकते हैं।
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