यूपी में 'महिलाओं' को बड़ी खुशखबरी, सरकार ने दी सौगात

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल ‘एक ग्राम पंचायत–एक बीसी सखी’ मॉडल ने न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच आसान की है, बल्कि हजारों ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है। इस योजना के तहत तैनात बीसी सखियों ने अब तक 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बैंकिंग लेन-देन कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

गांव-गांव पहुंची बैंकिंग सेवा

इस योजना की शुरुआत मई 2020 में की गई थी। इसका उद्देश्य था कि ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाओं के लिए शहरों या कस्बों की दूरी तय न करनी पड़े और साथ ही गांव की महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलें। आज बीसी सखियां गांवों में ही नकद जमा और निकासी, धन अंतरण, ऋण आवेदन, फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट जैसी सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इससे ग्रामीणों को न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि बैंकिंग प्रणाली पर उनका भरोसा भी बढ़ा है।

57 हजार ग्राम पंचायतों तक पहुंचने का लक्ष्य

प्रदेश सरकार ने राज्य की सभी 57,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों की तैनाती का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दिशा में अब तक 50,000 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित और प्रमाणित किया जा चुका है। इनमें से करीब 40,000 बीसी सखियां वर्तमान में गांवों में सक्रिय रूप से सेवाएं दे रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं।

प्रदेश में महिला स्वावलंबन की मजबूत नींव

‘बीसी सखी’ योजना महिला सशक्तिकरण की एक प्रभावी मिसाल बनकर उभरी है। इस पहल से जुड़ी महिलाओं ने अब तक 106 करोड़ रुपये से अधिक का लाभांश अर्जित किया है। नियमित आय के चलते ये महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां संभाल पा रही हैं, बल्कि गांव में उन्हें सम्मान और पहचान भी मिल रही है।

महिलाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ाव

बीसी सखियां ग्रामीण भारत को डिजिटल बैंकिंग से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। वे लोगों को डिजिटल लेन-देन के प्रति जागरूक कर रही हैं, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हो रही है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है।

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