रूस का बड़ा बयान: भारत पर भरोसा, अमेरिका पर नहीं?

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ‘महाडील’ ने वैश्विक व्यापार और रणनीतिक रिश्तों में नया मोड़ ला दिया है। इस समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से आने वाले कुछ उत्पादों पर ड्यूटी कम करने का निर्णय लिया है, जबकि अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ का बोझ हटा लिया। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को सरल और किफायती बनाना है।

हालांकि, इस डील के बाद यह सवाल उठता है कि क्या भारत और अमेरिका के बढ़ते संबंधों का असर भारत-रूस रिश्तों पर पड़ेगा। इस पर साफ संदेश दिया है रूसी संघ के महावाणिज्य दूत इवान फेतिसोव ने।

भारत-रूस के मजबूत द्विपक्षीय संबंध

इवान फेतिसोव ने नागपुर में आयोजित एडवांटेज विदर्भ 2026 अंतरराष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन में कहा कि भारत और रूस के बीच विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित मजबूत संबंध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मॉस्को सभी देशों के साथ रचनात्मक सहयोग के लिए खुला है, बशर्ते वे रूस के साथ भी साझेदारी करना चाहें। फेतिसोव ने कहा, कि अमेरिका-भारत समझौते से रूस के भरोसे या रणनीतिक संबंधों में कोई कमी नहीं आई है।

रणनीतिक सहयोग के क्षेत्रों पर जोर

भारत-रूस संबंधों की व्यापकता पर फेतिसोव ने पिछले साल पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की बैठक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संचार और ऊर्जा, खासकर परमाणु ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग का अवसर है। उन्होंने रॉसाटॉम की SMR (स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर) परियोजनाओं का हवाला देते हुए बताया कि यह सहयोग केवल तकनीक की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा प्रौद्योगिकी और संयुक्त परियोजनाओं पर केंद्रित होगा।

रूसी तेल खरीद पर भी स्थिति साफ 

अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है, पर फेतिसोव ने आधिकारिक रूसी बयानों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इस तरह के दावे पर सरकारी स्रोतों की पुष्टि जरूरी है। उनका कहना था कि भारत-रूस ऊर्जा और व्यापार सहयोग मजबूत आधार पर आधारित है।

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